
Tulasi Vivah Vrat Katha and Puja Vidhi 1 November 2017 News in Hindi
भौंरा/बैतूल। देवउठनी ग्यारस पर महिलाएं आमतौर पर घरों में तुलसी विवाह करती हैं लेकिन भौंरा में यह धार्मिक आयोजन किसी विवाह समारोह से कम नहीं होता है। तुलसी-शालिगराम के विवाह समारोह में शामिल होने के लिए बकायदा निमंत्रण पत्रिका छपवाई जाती है। पूरे गांव में पत्रिका बंटवाकर सभी को सहपरिवार विवाह आयोजन में शामिल होने का न्यौता दिया जाता है। देवउठनी ग्यारस पर मंगलवार को मंदिर परिसर में तुलसी का गणेश पूजन, माता पूजन एवं मंडपछादन किया गया। मुख्य आयोजन बुधवार को विवाह आयोजन का होना है जिसमें सालिगराम की बारात गांव में निकाली जाएगी। तुलसी-शालिगराम विवाह में पूरा गांव बना बाराती। महिला मंडल भौंरा द्वारा हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी देव उठनी ग्यारस पर तुलसी संग सालिगराम विवाह समारोह का आयोजन राधाकृष्ण मंदिर परिसर में आयोजित किया। महिला मंडल की सभी महिलाएं गाजे-बजे के साथ सुबह राधाकृष्ण मंदिर से खेड़ापति मंदिर माता पूजने गई थी। एक नंबर बुधवार को दोपहर २ बजे शालिगराम की बारात राधाकृष्ण मंदिर से निकाली जाएगी जो कि भौंरा के प्रमुख मार्गों से होती हुई वापस विवाह स्थल पहुंचेगी। यहां पर पंडित द्वारा विधि विधान से तुलसी का विवाह सालिगराम से कराया जाएगा। विवाह समारोह की पत्रिका पूरे गांव में बांटकर सभी को सहपरिवार विवाह में आमंत्रित किया है। तुलसी-शालिगराम विवाह में पूरा गांव बना बाराती।
घर-घर में हुआ तुलसी विवाह
बैतूल. मंगलवार को देव उठनी ग्यारस का त्यौहार बैतूल शहर में धूमधाम से मनाया। शाम को घर-घर में तुलसी विवाह का आयोजन किया। देव उठनी ग्यारस के साथ ही आज से विवाह आदि मंगलकार्यों का श्री गणेश भी हो गया है। मान्यता है, कि भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल की एकादशी को चार माह के लिए क्षीर सागर में शयन करते हैं। भगवान के शयनकाल के दौरान विवाह आदि मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। शास्त्रों के मुताबिक चतुर्मास के विश्राम के बाद भगवान कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं।
Published on:
31 Oct 2017 10:37 pm
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