
विलुप्त प्रजाति (धब्बेदार उल्लू) जूलॉजिकल नाम एथेने ब्रामा
होशंगाबाद। लगातार प्रदूषण के कारण जहां पक्षियों की संख्या में कमी आ रही है। वहीं शहर के होमसाइंस कॉलेज परिसर में आने वाले पक्षियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। इसका कारण यहां बना औषधि पार्क है। कॉलेज में प्राणीशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. दीपक अहिरवार के अनुसार पक्षियों के लिए उनके अनुकूल वातावरण देने से उनको बचाया जा सकता है। करीब १ साल पहले उन्होंने परिसर में इसे शुरू किया था जिसके सकारात्मक परिणाम हैं।
जैव विविधता के अंतगर्त सर्वे
डॉक्टर दीपक अहिरवार और उनकी छात्राओं ने इसी साल महाविद्यालय परिसर में जैव विवधिता के अंतगर्त एक सर्वे किया। जिसके अंतगर्त महाविद्यालय परिसर में कृतिम घौंसले बनाए गए, रसायन का प्रयोग बंद किया गया, प्रदूषण रहित वातावरण निर्मित किया। इस कारण कॉलेज परिसर में कुछ नई प्रजाति के पक्षी मिले हैं। इसमें क्रेन, नीलकंठ, गलगल, गौरैया, हमिंग बर्ड जैसे पक्षियों की मौजूदगी बड़ी है। जबकि शहर में यह पक्षी यदा-कदा ही नजर आते हैं।
गिद्ध ,कौवे, चील गायब
वर्तमान में गिद्ध करीब गायब हो गए हैं। इसकी क्षमता 40 किलोमीटर के रेडियस में उडऩे की थी इसी तरह कौवे और चील भी अब दिखना गायब हो गए हैं। इसका कारण जानवरों को लगाए जाने वाले इंजेक्शन हैं। क्योंकि यह तीनों पक्षी मरे हुए जानवरों को ही खाते हैं जिस कारण इनकी मौत हो रही है।
1. हर पक्षी की उपयोगिता पृथ्वी पर विशेष कारण से है यदि वह विलुप्त होता रहेगा तो इसका असर हमारी प्रकृति पर भी दिखाई देगा। आज हम सबको संकल्प लेकर पक्षियों को बचाने के लिए कार्य करने की जरूरत है।
डॉ. दीपक अहिरवार, विभागाध्यक्ष , प्राणी शास्त्र, होम साइंस कॉलेज
पक्षियों की विलुप्त के यह भी कारण
1. आधुनिक जीवन शैली के आवास और बढ़ता प्रदूषण
2. घरों में खेतों में जहरीले रसायनों का इस्तेमाल, जिसमें पेस्टीसाइड और इंसेक्टिसाइड जैसे रसायन महत्वपूर्ण है
3. जहरीले रसायनों के प्रयोग से पक्षियों की प्रजनन क्षमता भी कम हो रही है।
4. पिंजरों में रखने से पक्षियों की वंश वृद्धि हो रही कम।
5. शिकारियों द्वारा पक्षियों का शिकार होने से कर रहे पलायन
रोज सुबह देते हैं पक्षियों को दाना-पानी : शहर का एक ग्रुप हर रोज पार्क में पक्षियों के लिए दाना-पानी उपलब्ध करवाता है। ग्रुप के विवेक जैन, विजय चैकसे, प्रशांत दुबे, सफीक खान, अमित यदुवंशी, धर्मेंद्र तिवारी, सचिन चौरे सहित अन्य लोग नेहरू पार्क रोज सुबह दाना-पानी उपलब्ध कराते हैं। इस दौरान बड़ी संख्ख्या में पक्षी उनका इंतजार करते हैं। यह लोग करीब १ साल से यह काम कर रहे हैं।
Published on:
04 May 2018 12:55 pm
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