
World Soil Day: जानिए यहां की मिट्टी की खासियत, विश्व में केवल दो ही जगह प्रसिद्ध यहां का गेंहू और चना
होशंगाबाद. होशंगाबाद की काली मि_ी सबसे ज्यादा और अच्छी फसल की पैदावार के लिए जानी जाती है। धीरे-धीरे यह ताज छिनता जा रहा है। इसका कारण किसानों द्बारा लगातार रासायनिक खाद का उपयोग करना है। जिससे फसलों की पैदावार तो प्रभावित हो रही है साथ ही जमीन की उर्वरता भी खत्म हो रही है। मिट्टी परीक्षण विभाग की माने तो नाइट्रोजन में कमी, पोटेशियम की मात्रा हाई, फासफोरस मीडियम और सूक्ष्म तत्वों में जिंक की मात्रा लगातार घट रही है। जिसका असर सालों में उपज की पैदावार पर भी दिखा है।
जरूरत से ज्यादा उपयोग करते हैं यूरिया: सहायक मिट्टी परीक्षण अधिकारी जीएस बेले ने बताया कि किसान आर्गिनिक खेती न करते हुए रासायनिक खेती करते हैं। जिससे मिट्टी में मौजूद पोषण तत्वों खत्म हो रहे हैं। नाइट्रोजन और जिंक की कमी से वनस्पति कम होती है। जिससें यूरिया का उपयोग किसान जरूरत से ज्यादा करते हैं। वैसे नाइट्रोजन 120, पोटेशियम 60 एवं फासफोरस 40 किलो प्रति हैक्टेरियर उपयोग किया जाना चाहिए। लेकिन किसान 150 बोरी तक यूूरिया का इस्तेमाल करते हैं।
कभी यह थी हमारी पहचान
होशंगाबाद शहर की काली मिट्टी की सबसे बड़ी विशेषता इसमें हयूमस का होना है जिसमें सभी पोषण तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। इसकी खासियत है कि 20 से 25 दिनों तक पानी डालने की जरूरत नहीं होती है। ये सबसे अच्छी क्ववालिटी की मिट्टी मानी जाती है। इस मिट्टी का गेंहू और चने की उपज विश्व प्रसिद्ध है।
ये मिट्टी भी है खास
जिला समन्वय जैव विविधता आर.आर सोनी ने बताया काली मि_ी, रेतीली मिट्टी, दोमट मिट्टी एवं सफेद मिट्टी मुख्यत: होती है। काली मिट्टी से रवि की फसल व दोमट मिट्टी से खरीफ की फसल पैदावार होती है।
यह हैं पोषक तत्व
१. प्राथमिक पोषक तत्व : नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश।
२. द्वितीय पोषक तत्व : कैल्शियम, सल्फर, मैग्रीसियम और सिलिकॉन।
३. सूक्ष्म पोषक तत्व : बोरॉन, क्लोरीन, मैगनीज, लोहा, जस्ता, तांबा, मॉलिब्डेनम, निकल सेलेनियम और सोडियम।
Published on:
05 Dec 2018 01:49 pm
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