
हुब्बल्ली (कर्नाटक) में आयोजित राजस्थान पत्रिका परिचर्चा में भाग लेते प्रवासी। इस दौरान प्रवासियों ने चाय के सामाजिक, सांस्कृतिक और दैनिक जीवन में महत्व पर अपने विचार साझा किए।
मेहमाननवाजी की पहली पसंद
धानसा (जालोर) के वेलाराम घांची ने कहा, मेहमानवाजी चाय के बिना अधूरी मानी जाती है। घर आए मेहमान को सबसे पहले चाय देना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। चाय के साथ रिश्तों में आत्मीयता और अपनापन भी जुड़ता है।
ताजगी और चर्चा का माध्यम
जोधपुर के अभिषेक मेहता ने कहा, चाय हमें ब्रिटिश काल की एक सौगात के रूप में मिली, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। समय के साथ चाय लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गई है। चाय ताजगी देती है और देश में इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
गांव की परंपरा में बसी चाय
चूली (सिरोही) निवासी भगवानराम प्रजापत ने कहा, गांवों में आज भी मेहमानों का स्वागत सबसे पहले चाय से किया जाता है। बाकी काम बाद में होते हैं, लेकिन चाय पहले परोसी जाती है। यह हमारी परंपरा और अपनत्व की पहचान बन चुकी है।
सुबह की शुरुआत का साथी
कराड़ी (पाली) निवासी बाबूलाल सीरवी ने कहा, हमारे परिवार में सुबह की शुरुआत चाय से ही होती है। दोस्त या रिश्तेदार घर आएं तो सबसे पहले चाय का दौर चलता है। बातचीत और अपनापन भी अक्सर चाय की चुस्कियों के साथ ही शुरू होता है। आज चाय लोगों को जोडऩे का माध्यम बन गई है।
चाय जोड़ती भी है और रोजगार भी देती है
आमलारी (सिरोही) के अर्जनसिंह राजपुरोहित ने कहा, चाय लोगों को जोडऩे के साथ रोजगार का बड़ा माध्यम भी बन चुकी है। हजारों लोग चाय व्यवसाय और दुकानों से जुड़े हुए हैं। अदरक, काली मिर्च और नींबू जैसी वैरायटी वाली चाय स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक मानी जा रही है। कोरोना के बाद लोगों का झुकाव स्वास्थ्यवर्धक चाय की ओर और अधिक बढ़ा है।
जीवन में घुली चाय की मिठास
हरजी (जालोर) निवासी केसाराम चौधरी ने कहा, चाय अब जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। दिनभर की थकान हो या काम के बीच थोड़ी राहत, चाय हर मौके पर साथ रहती है। सच कहें तो चाय जीवन में ऊर्जा घोलने का काम करती है।
चाय जोड़ती है लोगों को
बाली (पाली) निवासी रामलाल जणवा चौधरी ने कहा, चाय केवल एक पेय नहीं, बल्कि लोगों को आपस में जोडऩे का माध्यम है। अक्सर चाय की एक प्याली के साथ बातचीत शुरू होती है और रिश्तों में अपनापन बढ़ता है। परिवार, दोस्त और समाज को करीब लाने में चाय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
परिचर्चा के दौरान ये भी रहे मौजूद
परिचर्चा के दौरान हेमंत, अशोक प्रजापत, जगदीश देवासी खेजडिय़ाली, भंवराराम चौधरी मांगला, कमलेश चौधरी मेली समेत अन्य प्रवासी उपस्थित थे।
Updated on:
20 May 2026 07:50 pm
Published on:
20 May 2026 07:50 pm
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