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गोबर से इको फ्रेन्डली मूर्तियां बना रही यहां की महिलाएं, गांव को मिली नई पहचान

Chhattisgarh news: जिले मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव सिरसाखुर्द की महिलाएं गोबर से मूर्तियां बना रही हैं। ये महिलाएं न सिर्फ ये खास मूर्तियां तैयार करती हैं बल्कि मांग के अनुसार बाजारों में भी उपलब्ध करा रही है।

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गोबर से इको फ्रेन्डली मूर्तियां बना रही यहां की महिलाएं, गांव को मिली नई पहचान

Chhattisgarh news: दुर्ग जिले के सिरसाखुर्द गांव की महिलाएं जय बजरंग स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। बारह महिलाओं का यह समूह इन मूर्तियों की वजह से काफी चर्चा में है। इससे गांव की पहचान अब मूर्ति कला के लिए होने लगी है।

महिलाएं साथ मिलकर इन मूर्तियों को तैयार करती हैं। ये महिलाएं गोबर से मूर्तियां बनाने के साथ-साथ त्यौहार के लिए देवी-देवताओं की मूर्तियां, दीयेे, शुभ-लाभ जैसी कई सामग्रियां बना रही हैं। जब उनसे पूछा गया कि ये मूर्तियां कैसे बनती है, तो इस पर जय बजरंग स्व-सहायता समूह की हेमलता सावें बताती है कि पहले गोबर से कंडे बनाते हैं, फिर उन्हें सुखाकर कूटते हैं। उसके बाद चक्की में पीसते हैं। पीस कर इसमें चिकना मुलतानी मिट्टी का मिश्रण डालकर पानी से गुंथा जाता है और अंत में सांचे में डाल कर मूर्तियां तैयार की जाती है।

15 दिन में लेता है आकार

उन्होंने बताया कि गोबर से मूर्ति बनाने में 15 दिन का समय लगता है। उन्होंने बताया कि 12 सदस्यों वाला जय बजरंग स्व-सहायता समूह ने नागपुर में मूर्ति बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत समूह की महिलाओं द्वारा मूर्तियां तैयार कर उसे स्थानीय बाजार में विक्रय कर आय अर्जित कर रही हैं जो उनके जीविका का साधन है।

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सीएम को भेंट कर चुकीं है मूर्ति

उन्होंने बताया कि पुरई में भेंट-मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री को स्व सहायता समूह की तरफ से गोबर से बनी मूर्ति भेंट की थी। गोबर से बने होने के कारण यह इको फ्रेन्डली है। मूर्ति के नष्ट हो जाने पर इसे गमले या बगीचे में डाला जा सकता है। इससे पर्यावरण को भी नुकसान नही होगा और खाद का भी काम करेगा। तब इन महिलाओं के हुनर की सराहना सीएम ने सराहा।