
सावधान रहे, इंदौर से चल रही 81 फर्जी एडवाइजरी कंपनियां कर रही करोड़ों की धोखाधड़ी
प्रमोद मिश्रा
इंदौर. देशभर के लोगों को ठगने वाली फर्जी एडवाइजरी कंपनियोंं का इंदौर सेंटर पाइंट बन गया है। पिछले एक साल में पुलिस ने करीब 40 कंपनियों को पकड़ा। अधिकारी मान रहे थे कि ठगी की फैक्टरी बनी एडवाइजरी कंपनियां बंद हो गई है लेकिन राऊ पुलिस की गिरफ्त में आए लेपटॉप की तकनीकी जांच में बड़ा खुलासा हो गया। पता चला कि इंंदौर में इस समय 81 फर्जी एडवाइजरी कंपनियों का ठिकाना है। खुलासे के बाद कमिश्नर ने जांच राऊ पुलिस से लेकर क्राइम ब्रांच को सौंप दी है।
एक समय गुजरात के शहर एडवाइजरी कंपनियों का ठिकाना थे लेकिन पिछले दो तीन साल से इंदौर बड़ा सेंटर पाइंट बनकर सामने आया है। यहां संचालित होने वाली कई फर्जी एडवाइजरी कंपनियों ने देशभर के लोगों से करीब 200-250 करोड़ की ठगी की है। पहले पुलिस मिलीभगत से कंपनियां संचालित हो रही थी लेकिन जब कार्रवाई शुरू हुई तो हड़कंप मच गया। पिछले एक साल में इंदौर में 40 फर्जी एडवाइजरी कंपनियां पकड़ी जा चुकी है। अकेले विजयनगर में 20 मामले आए है। तुकोगंज, कनाडिया, पलासिया व राऊ पुलिस ने भी कुछ फर्जीवाड़े पकड़े।
हाल ही में राऊ पुलिस ने एक गिरोह को पकड़ा तो पता चला कि वे फर्जी नाम एडवाइजरी कंपनियां बनाकर लोगों को ठग रहे है। आरोपियों के निशाने पर सेना के अफसर व कर्मचारी भी थे। तीन सैन्य अधिकारियों से लाखों वसूले थे। गिरोह की सरगना नेपाल की मूल निवासी पूजा थापा, पवन तिवारी, विशाल आदि पंद्रह आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके है। आरोपियों द्वारा देशभर के लोगों से करीब 15 करोड़ की ठगी का रिकॉर्ड पुलिस को मिल चुका है, 24 बैंक खाते फ्रीज कराए है।
पुलिस ने गिरोह को ठगी के लिए डाटा उपलब्ध कराने वाले अमित बरफा को पकड़कर लेपटॉप जब्त किया तो बड़ा खुलासा हुआ। अमित कई कंपनियों को इंटरनेट से लोगों का डाटा हासिल कर कंपनियों को उपलब्ध कराता था। जब उसके लेपटॉप की डीसीपी अमित तोलानी ने तकनीकी जांच कराई तो पता चला कि एक दो नहीं 81 एडवाइजरी कंपनियों को वह कालिंग के लिए लोगों का डाटा उपलब्ध कराया था। सेबी से भी जानकारी ली। पुलिस का मानना है कि सभी 81 एडवाइजरी कंपनियां फर्जीवाड़ा कर देशभर के लोगों को ठग रही है। राऊ टीआइ नरेंद्र रघुवंंशी की टीम ने छापे मारे लेकिन कंपनियां बंद पाई गई। वहां किसी तरह का बोर्ड भी नहीं मिला।
फर्जीवाड़े की 81 कंपनियां मिली, क्राइम ब्रांंच करेगी जांच
डाटा उपलब्ध कराने वाले अमित बरफा व अन्य जब्त लेपटॉप से 81 फर्जीवाड़े की कंपनियों का पता चला है। अधिकांश कंपनियां इंदौर से संचालित होती है लेकिन फिलहाल काम बंद कर दिया। मामला बहुत बड़ा हो गया है, राऊ पुलिस इतनी बड़ी कार्रवाई के लिए सक्षम नहींं है। पुलिस कमिश्नर हरिनारायणाचारी मिश्र ने मामलेे को गंभीरता से लेते हुए जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। डीसीपी निमिष अग्रवाल की टीम अब सभी संदेही कंपनियों की जांच करेगी।
अमित तोलानी, डीसीपी जोन 1।
एक-एक लाख वेतन में बनाए एजेंट
पुलिस की जांच में पता चला कि आरोपियों को पास लोगों को जो डाटा आता है वह उज्जैन, देवास, रीवा, सतना, शाजापुर आदि इलाकों में एजेंट तैनात कर उन्हें दिया जाता है। सभी का काम कॉलिंग कर लोगों को ठगना और बैंक खातों में पैसा जमा कराना होता है। एजेंट को एक-एक लाख का वेतन दिया जाता है। ज्यादा ठगी करने पर बोनस अलग। इंदौर में पुलिस की नजर होने से अब कॉल सेंटर की बजाए एजेंट्स से काम करवाया जा रहा है।
इंदौर में बैठकर दिल्ली, मुंबई, बंगलुरू, जम्मू के लोगों को ठगा
डीसीपी के मुताबिक, कंपनियां काम इंदौर में करती है लेकिन यहां के लोगों को निशाना नहीं बनाते हुए दूर दराज के लोग खासकर बुजुर्गों को निशाना बनाती है। स्थानीय व्यक्ति ठगी पर तुरंत कार्रवाई कर देता है इसलिए बाहरी व्यक्ति को ठगा जाता है। इंदौर में बैठकर दिल्ली, मुंबई, बंगलुरू, कोलकाता, हैदराबाद, जम्मू तक के लोगों को बनाया निशाना। हरियाणा, पंजाब के लोग भी शिकायत कर चुके है।
एडवाइजरी कारोबार: एक नजर
- एक साल में 40 एडवाइजरी कंपनियों के 125 आरोपी गिरफ्तार हुए।
- विजयनगर पुलिस ने 27 फर्जी एडवाइजरी कंपनियों पर केस दर्ज किए।
- विजयनगर पुलिस ने ठगाए लोगों को 10 करोड़ वापस करवाए।
- कंपनियों द्वारा 200 से 250 करोड़ की ठगी का अंदेशा।
- फॉरेन ट्रेडिंग फ्रॉड गिरोह पकड़ाया, इस गिरोह ने की 50 करोड़ की ठगी
- सरगना अतुल व उसकी पत्नी दुबई में छिपे
Published on:
16 May 2022 06:37 pm

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