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9 महीने पहले युवक की गोली लगने से मौत, फिर से होगी जांच

- परिजनों का आरोप हत्या की गई

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9 महीने पहले युवक की गोली लगने से मौत, फिर से होगी जांच

9 महीने पहले युवक की गोली लगने से मौत, फिर से होगी जांच

इंदौर. छत्रीपुरा थाने से जुड़े करीब 9 महीने पुराने युवक की गोली लगने से मौत के मामले में एक बार फिर से जांच के आदेश कोर्ट ने दिए हैं। मृतक के भाई द्वारा हाई कोर्ट में दायर याचिका पर जस्टिस विजय कुमार शुक्ला ने पुलिस कमिश्नर को एक महीने में फिर से जांच कर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। पुलिस कहानी के अनुसार युवक ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या की थी, जबकि उसके परिजनों का आरोप है कि उसकी हत्या की गई है। एडवोकेट आशुतोष शर्मा ने बताया, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवक द्वारा आत्महत्या करने पर शक जाहिर किया गया है। इसके अलावा अन्य तर्कों से सहमत होकर कोर्ट ने फिर से जांच के आदेश दिए हैं। शर्मा ने बताया, 19 जून 2021 को छत्रीपुरा थाना क्षेत्र में नवीन परमार की सिर में गोली लगने से मौत हो गई थी। आरोप है कि वह अपने प्रेमिका से मिलने उसके घर गया था, विवाद होने पर खुद को गोली मार ली थी। नवीन के परिजनों का आरोप है, युवती के घर वालों ने गोली मारकर उसकी हत्या की है। ऑनर किलिंग से जुड़े इस मामले को पुलिस द्वारा आत्महत्या का केस बताया जा रहा है। आरोप है, रिपोर्ट में उल्लेख होने के बाद भी पुलिस केस को हत्या के बजाए आत्महत्या मान रही है।

10 रुपए की रिश्वत लेते पकड़ाए कोर्ट कर्मचारी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश हाईकोर्ट ने पाया सही

इंदौर. तारीख बढ़ाने के नाम पर 10 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ाए जबलपुर की जिला कोर्ट के रीडर की अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने से जुड़े आदेश को हाई कोर्ट ने सही पाया है। रिश्वत लेने से जुड़े सबूत और गवाहों के बयानों को सही मानते हुए इंदौर हाई कोर्ट की युगल पीठ ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के फैसले को बदलने से इनकार कर दिया है। जबलपुर के रीडर स्व. कनक कुमार श्रीवास्तव की पत्नी सुचित्रा ने 10 अक्टूबर 2011 को दिए गए आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। 27 जुलाई 2008 को जिला कोर्ट की विजिलेंस टीम ने तारीख बढ़ाने के नाम पर 10 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था। विजिलेंस टीम सहित अपील प्राधिकरण ने भी उन्हें दोषी पाते हुए अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सजा सुनाई थी। उस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में 2015 में दायर याचिका पर अब फैसला सुनाया गया है।

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