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पेंशन घोटाला: 17 वर्ष बाद भी सरकार ने कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ नहीं दी अभियोजन स्वीकृति

- रमेश मेंदोला और तत्कालीन महापौर उमा शशि शर्मा सहित अन्य पर कार्रवाई करने की मांग

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पेंशन घोटाला: 17 वर्ष बाद भी सरकार ने कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ नहीं दी अभियोजन स्वीकृति

पेंशन घोटाला: 17 वर्ष बाद भी सरकार ने कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ नहीं दी अभियोजन स्वीकृति

इंदौर. करीब 17 साल पुराने शहर के चर्चित पेंशन घोटाले से जुड़े परिवाद में गुरुवार को इंदौर विशेष न्यायालय में सुनवाई हुई। इस केस में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, विधायक रमेश मेंदोला और तत्कालीन महापौर उमा शशि शर्मा सहित अन्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। घोटाले के 17 साल बीतने के बाद भी अब तक शासन ने तत्कालीन जन प्रतिनिधियों के खिलाफ केस चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति नहीं दी है। गुरुवार को परिवादी कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री केके मिश्रा की ओर से आवेदन पेश किया गया है। उसमें उल्लेख है कि सुप्रीम कोर्ट एवं इलाहबाद हाई कोर्ट ने ऐसे मामलों में आदेश दिए हैं कि शासन को अभियोजन स्वीकृति लेने से जुड़े आवेदनों पर तीन माह के भीतर फैसला लेना चाहिए, यदि फैसला नहीं लिया जाता है तो तीन महीने बाद डीम्ड परमिशन मानी जाती है। इस आधार पर इस केस में भी अभियोजन स्वीकृति मान कर केस आगे बढ़ाया जाना चाहिए। कोर्ट ने आवेदन पर 25 अप्रैल को सुनवाई के आदेश दिए हैं।परिवाद में पेंशन वितरण के नाम पर अपने करीबियों में राशि वितरण करने का आरोप है। मिश्रा ने इस घोटाले को 2005 में उजागर किया था और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के लिए परिवाद दायर किया है। अब तक इस मामले की सुनवाई भोपाल में चल रही थी, लेकिन इंदौर में एमपी- एमएलए कोर्ट शुरू होने के बाद पहली बार गुरुवार को कोर्ट में सुनवाइ हुई। एडवोकेट विभोर खंडेलवाल ने बताया ने परिवादी मिश्रा को अभियोजन स्वीकृति पेश करने के लिए गुरुवार को आखिरी मौका दिया था और उसके चलते ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा आवेदन पेश किया गया है। विशेष अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश नाथ की कोर्ट में प्रकरण की अगली सुनवाई होगी।

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