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आयुष्मान भारत योजनाः इंदौर में सामने आए सिर्फ चार निजी अस्पताल

15 अगस्त की बजाए योजना लॉन्च होगी 25 सितंबर को, प्रदेश की 1.40 करोड़ जनता आएगी दायरे में

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इंदौर. आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब मरीजों का पांच लाख रुपए तक का इलाज नि:शुल्क करने के लिए निजी अस्पतालों द्वारा रजिस्ट्रेशन में रुची नहीं दिखाने के कारण योजना को आगे बढ़ाना पड़ा है। प्रदेश में अब 15 अगस्त की बजाए योजना को 25 सितंबर तक लॉन्च किया जाएगा।कई माह से योजना को लागू करने के लिए प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। 15 अगस्त को योजना को लॉन्च करने की समय सीमा रखी गई थी। प्रदेश की 1.40 करोड़ जनता को योजना के दायरे में लाया जाएगा।

पहले यह आंकड़ा 84 लाख था, लेकिन संबल योजना के हितग्राहियों को भी शामिल किया है। योजना के लिए आयुष्मान मित्र बनाकर उनकी ट्रेनिंग की जा रही है। निगरानी के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी बनाई है। 23 तरह की बीमारियों के इलाज के लिए पांच लाख रुपए तक का इलाज नि:शुल्क होगा, बीमे की प्रीमियम सरकार द्वारा भरी जाएगी। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन किया जाना है। जिला नोडल अधिकारी डॉ. धर्मेन्द्र जैन ने बताया, भोपाल में हुई बैठक में हुई बैठक के बाद योजना की तारिख आगे बढ़ाई गई हैं। दीनदयाल जयंती २५ सितंबर को योजना लॉन्च होगी और १२ अक्टूबर तक पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। शहर की बात करें तो अब तक चार निजी अस्पतालों के आवेदन प्राप्त हुए हैं। प्रदेश में यह आंकड़ा ८७ है। सभी पात्र सरकारी अस्पतालों में भी योजना लागू की जाएगी।

एक हजार करोड़ रुपए होंगे निवेश

सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण 2011 के हिसाब से केंद्र ने गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को कैशलेस इलाज वाली सुविधा के दायरे में शामिल किया जाएगा। योजना में केंद्र सरकार और राज्य सरकार एक हजार करोड़ रुपए तक खर्च करेंगे। इसमें केंद्र का योगदान 60 फीसदी और राज्य सरकार का हिस्सा 40 फीसदी रहेगा। फिलहाल प्रदेश में 85 लाख बीपीएल परिवार चिन्हित है। योजना में असंगठित श्रमिक, लघु किसान परिवार के साथ संबल योजना के परिवारों को जोड़ा है। इस तरह यह आंकड़ा 1.40 करोड़ तक पहुंचा है। प्रत्येक परिवार के लिए सालाना इलाज की सीमा 5 लाख रुपए तक तय रहेगी।

एनएबीएच सर्टिफिकेट को लेकर संक्षय

हाल ही में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के साथ हुई बैठक के बाद सरकार ने तय किया कि योजना में उन अस्पतालों को भी शामिल किया जाएगा, जिनके पास एनएबीएच (नेशनल एक्रीडिएशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल) प्रमाण पत्र नहीं है। हालांकि एनएबीएच प्रमाणपत्रधारी अस्पतालों को सरकार द्वारा तय पैकेज से 15 फीसदी तक अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। इसको लेकर आदेश अब तक जिला मुख्यालयों में नहीं पहुंचे हैं। 15 फीसदी राशि नहीं मिलने को लेकर भी निजी अस्पताल रुचि नहीं ले रहे हैं। साथ ही अस्पतालों का ध्यान पहले से केशलेस पॉलिसी धारियों के इलाज पर ज्यादा है।