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अभिमन्यु थैरेपी से गर्भ में खुश होगा शिशु

अभिमन्यु थेरैपी इंट्रोड्यूज करने वाली डॉ. स्नेहलता देशमुख से चर्चा

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Shruti Agrawal

Jun 30, 2016

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इंदौर. गर्भ में पल रहे शिशु को अगर संगीत सुनाया जाए तो वह खुश होता है। अगर रोज संगीत सुनाया जाए तो और भी बेहतर। संगीत गर्भस्थ शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में बहुत मदद करता है। ये बात मुंबई से आई शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. स्नेहलता देशमुख ने पत्रिका से चर्चा में कही। बुधवार को बाल निकेतन संघ में आयोजित कार्यक्रम में हुए व्याख्यान के सिलसिले में वे शहर में थीं।

मुंबई के जीएस मेडिकल और केईएम अस्पताल में शिशु रोग विभाग की पूर्व एचओडी डॉ. स्नेहलता देशमुख मुंबई यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर रह चुकी हैं। अभिमन्यु थेरैपी उनके 25 साल के अनुभवों और प्रयोगों का निचोड़ है और इसे वे अनौपचारिक रूप से प्रचारित करती हैं। मुंबई की कई स्त्री रोग विशेषज्ञ उनसे जुड़ी हैं, जिनके जरिए वे गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग करती हैं।

संगीत से विकसित होता है दिमाग

डॉ. देशमुख ने बताया कि अभिमन्यु थेरैपी के चार आयाम हैं, खान-पान, व्यायाम, संगीत और संस्कार। खान-पान और व्यायाम के बारे में आमतौर पर महिलाओं में जागरूकता है, लेकिन संगीत के असर के बारे में कम लोग जानते हैं। उन्होंने एक गर्भस्थ शिशु पर प्रयोग करते हुए बच्चे के पिता को पं. भीमसेन जोशी का गाया हुआ एक भजन रोज सुनाने को कहा। जब पिता भजन गाता तो उस वक्त सोनोग्राफी करने पर पता चला कि बच्चे के चेहरे पर खुशी के भाव हैं। ये प्रक्रिया कई दिन तक चली। एक दिन उसे पं. भीमसेन जोशी की ही आवाज में भजन सुनाया तो बच्चे ने रिएक्ट नहीं किया। यानी बच्चा पिता की आवाज को पहचानने लगा था।

राग यमन और केदार का ज्यादा असर

अभिमन्यु थेरैपी के लिए शास्त्रीय संगीत ही ज्यादा प्रभावी होता है। खास तौर से राग यमन और केदार। शुरुआती महीनों में उसे विलंबित लय सुनानी चाहिए और सातवें महीने से द्रुत लय। संगीत से बच्चे का दिमाग अच्छी तरह विकसित होता है और उसका वजन बढ़ता है।

बच्चे से करें बात

अभिमन्यु थेरैपी का चौथा आयाम यानी संस्कार। इसके लिए माता- पिता को बच्चे से बात करना चाहिए। बातें धीरे- धीरे करें। उनमें बच्चे की तारीफ हो। कोई शिक्षाप्रद कहानी या कविता भी हो सकती है। हालांकि बच्चा भाषा नहीं समझता, लेकिन वह ध्वनि तरंगे पकड़ता है। अपनी मां की बोली पहचानने लगता है।

20 मिनट की वॉक रोज

गर्भवती को ज्यादा मेहनत वाले काम नहीं करना चाहिए, लेकिन 20 मिनट की वॉक रोज करें। योगासन केवल डॉक्टर की सलाह और सोनोग्राफी करवाने के बाद ही करें।

गर्भवती की डाइट में ये हो शामिल

आधा से एक लीटर तक दूध
राजगिरा या रागी की खीर
मुनक्का, खजूर, मूंगफली
डेयरी प्रोडक्ट, एग वाइट
मूंग की दाल, अंकुरित अनाज
हरी सब्जियां, फलड्ड

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