
बिटिया @ Work : बेटियों ने दिए नए आइडियाज, बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की जगाई उम्मीद
इंदौर. बेटियां पैरेंट्स के ऑफिस पहुंच रही हैं। ऑफिस में उनका आना नई सोच लेकर आया। बेटियों ने सारी व्यवस्थाएं देखीं, गतिविधियों को समझा और अपने हिसाब से उसमें बदलाव के सुझाव भी दिए। उनकी प्रतिभा ने माता-पिता को भी चौंका दिया। उम्मीद जगाई कि जिस दिन ये पेशेवर के रूप में मैदान में होंगी, बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर लेकर जाएंगी। पत्रिका के बिटिया एट ऑफिस अभियान के तहत माता-पिता के दफ्तर पहुंची बेटियों ने कई इनोवेटिव आइडियाज साझा किए।
पापा की तरह बनूंगी एडवोकेट
पापा के ऑफिस में देखा कि वे समाज के वंचित वर्ग को भी न्याय दिलाने के लिए कितनी मेहनत करते हैं। मैं भी पापा की तरह न्याय क्षेत्र में ही कॅरियर बनाकर समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना चाहती हूं। - आधित्री तिवारी
ऑफिस : महाधिवक्ता कार्यालय
बिटिया का नाम : आधित्री तिवारी
पिता का नाम : कमल कुमार तिवारी
हार्डवर्क से होती हूं मोटिवेट
पापा के ऑफिस आकर काफी मोटिवेशन मिला। यहां पता चला कि हमारी इच्छाओं को पूरा करने के लिए वे कितनी मेहनत करते हैं। कुछ कामों में उनकी मदद करती हूं। उनका हार्डवर्क हमेशा मुझे प्रेरित करता है। -छाया शर्मा
ऑफिस: सनातन बस बॉडी बिल्डर्स
बिटिया का नाम: छाया शर्मा
पिता का नाम: शिवनारायण शर्मा
लेदर डिजाइनिंग कोर्स कर हाथ बटाऊंगी
पापा के ऑफिस से पॉजीटिव एनर्जी मिलती है। स्कूल के बाद एक घंटे पापा के साथ रहती हूं। लेदर डिजाइनिंग का कोर्स करना है। बिजनेस में उनकी मदद करनी है। - जया
ऑफिस: गगन लेदर हाउस
बिटिया का नाम: जया पाटीदार
पिता का नाम: मुकेश पाटीदार
मां की तरह बनना है
मम्मी के साथ ऑफिस जाती हूं। काम के साथ पढ़ाई में भी हेल्प करती हैं। बड़ा होकर उनकी तरह बनना है। इसी तरह अपने सपने पूरे करने हैं।
ऑफिस: वाना पफ
बिटिया का नाम: निशिका ओझा
माता का नाम: माधुरी ओझा
मॉम से मिली नई राह
मॉम के ऑफिस विजिट करना हमेशा से काफी अच्छा अनुभव रहता है। बहुत सीखने को मिलता है। उन्हें देखकर हमेशा मोटिवेट होती हूं। इच्छा है कि आगे उनके जैसा नाम कमाऊं। -देविना गुप्ता
ऑफिस: हेलेन ओ ग्रेडी एकेडमी
बिटिया का नाम: देविना गुप्ता
माता का नाम: नीलिमा गुप्ता
पापा की करना है मदद
पुनीत बताते हैं कि बेटियां ऑफिस आती हैं तो पूरा माहौल पॉजीटिव रहता है। स्टाफ भी खुश हो जाता है। लक्षिता कहती हैं कि ऑफिस आना अच्छा लगता है। आगे पापा के काम में मदद करना चाहती हूं। - लक्षिता माधवानी
ऑफिस: एजु केयर ओवरसीज
बिटिया का नाम: लक्षिता माधवानी
पिता का नाम: पुनीत माधवानी
हार्डवर्क से सीखा
आज पापा के ऑफिस आना हुआ तो पता चला कि वे कितना काम करते हैं। वकालत करना आसान नहीं होता, बहुत मेहनत लगती है। उनके हार्डवर्क से बहुत कुछ सीखने को मिला है। लॉ सेक्टर में ही कॅरियर बनाना है। - हिमांशी आसुदानी
ऑफिस: आसुदानी एंड एसोसिएट्स
बिटिया का नाम: हिमांशी आसुदानी
पिता का नाम: विजय आसुदानी
मुझे भी उनके जैसा एडवोकेट बनना है
आठ साल की निष्ठा बताती हैं कि ऑफिस आकर पिता के कार्य करने की तरीके को समझा। कानूनी लड़ाई लडऩे के लिए काफी मेहनत और तैयारी करनी होती है। मैं भी वकील बनना चाहती हूं। - निष्ठा शर्मा
ऑफिस: शर्मा एसोसिएट्स
बिटिया का नाम: निष्ठा शर्मा
पिता का नाम: विकास शर्मा
Published on:
26 Sept 2018 01:12 pm
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