
bjp protest on collectorate, MLA Manoj Patel
इंदौर।
कलेक्टोरेट के घेराव में देपालपुर के पूर्व विधायक मनोज पटेल की भूमिका पर सवाल उठने लगे। भाजपा में चर्चा है कि ना तो कार्यक्रम की तैयारियों और व्यवस्थाओं को लेकर हुई किसी बैठक में आए और ना ही किसी से संपर्क साधा, लेकिन शिवराजसिंह के सामने इस तरह आए, जैसे सारी कमान उन्हीं ने संभाल रखी हो।
कलेक्टोरेट में प्रदर्शन के दौरान पटेल ने शिवराज की बांह थाम रखी थी और उन्हीं के साथ-साथ लगे रहे। इसको लेकर जमकर चर्चा हो रही है। कई नेता इसको लेकर नाराज भी हैं कि किया -धरा कुछ है नहीं और आका आए तो उनके साथ लग गए। यह बात काफी हद तक सही भी है। इस धरना प्रदर्शन का शेड्यूल प्रदेश भाजपा ने तय किया था। इसके लिए नगर और ग्रामीण भाजपा ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस ली थी, इसमें भी पटेल नहीं थे। इसके बाद तैयारियों को लेकर जिले की भाजपा की बैठक हुई थी, इसमें भी पटेल अनुपस्थित थे। कहा तो यहां तक जा रहा है कि कार्यक्रम के लिए किसी से संपर्क भी नहीं किया। पर जैसे ही शिवराज इंदौर आए वे आगे आ गए और मंच हो या ट्रैक्टर उनके साथ ही लगे रहे।
नगर महामंत्री से हुई बहस
कार्यक्रम के दौरान पटेल ने नगर महामंत्री मुकेश सिंह राजावत से बहस भी कर ली। दरअसल मंच पर भाषण के बाद शिवराज सिंह को कलेक्टोरेट के गेट पर पहुंचकर सांकेतिक रूप से घेराव करना था। जब उन्हें वहां चलने को कहा तो पटेल ने कहा कि वे नहीं जाएंगे, क्योंकि कलेक्टोरेट बंद है। ऐसे में वहां जाकर क्या फायदा। इस पर राजावत ने कहा कि इसीलिए तो वे यहां आए हैं और कार्यक्रम प्रदेश से तय हुआ है, इसलिए उन्हें वहां चलना चाहिए। आखिर शिवराज भी वहां जाने पर सहमत हुए और ट्रैक्टर पर सवार होकर कलेक्टोरेट गेट तक पहुंचे। जैसे ही वे ट्रैक्टर पर चढ़े, पटेल लपककर पीछे खड़े हो गए।
मधु वर्मा ने दिखाई ताकत
इस कार्यक्रम को सफल करने में अहम् भूमिका राऊ से भाजपा प्रत्याशी रहे मधु वर्मा की रही। प्रदर्शन शुरू होने का समय यूं तो 12 बजे का था, लेकिन एक-सवा बजे तक मौके पर बहुत ज्यादा भीड़ नहीं थी। सौ-दो सौ लोग चौराहे पर थे, जिनमें से ज्यादातर नगर और ग्रामीण नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता थे। इसके बाद वर्मा काफिला लेकर पहुंचे तो चौराहा भर गया। उन्होंने रीजनल पार्क पर सभी को इकट्ठा किया था और वहां से बड़ी रैली के रूप में पहुंचे। काफिले में एक हजार के आसपास बाइक व चार पहिया वाहन और दो से ढाई सौ ट्रैक्टर ट्रॉलियां थीं, जिनमें प्याज भरकर लाए गए थे। यदि वर्मा का काफिला नहीं पहुंचता तो कार्यक्रम एक तरह से फेल ही हो गया था।
Updated on:
10 Mar 2019 11:30 am
Published on:
10 Mar 2019 11:29 am
