7 जुलाई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सब-कुछ उलट-पलट: क्यों मार्च में रजिस्ट्री कराने से बच रहे खरीदार-बेचवाल?

फ्लैट और खेती की जमीन की बड़े पैमाने पर रुकी रजिस्ट्री, रजिस्ट्रार ऑफिस पर नहीं दिखाई दे रहा वित्त वर्ष खत्म होने का असर
2 min read
Google source verification
registry

सब-कुछ उलट-पलट: क्यों मार्च में रजिस्ट्री कराने से बच रहे खरीदार-बेचवाल?


इंदौर। रजिस्ट्रार कार्यालय को वर्ष 2019 का लक्ष्य पूरा करने में पसीने छूट रहे हैं, क्योंकि सब कुछ उलट-पलट हो रहा है। हर बार गाइड लाइन बढ़ कर एक अप्रैल से लागू होती थी। पैसे बचाने के लिए खरीददार मार्च में रजिस्ट्री कराते थे। इस बार मामला उलटा है। अप्रैल में रजिस्ट्री कराना ज्यादा फायदेमंद होगा, क्योंकि फ्लैट पर जीएसटी कम कर दी गई तो खेती की जमीन पर स्टॉम्प ड्यूटी की छूट दे दी गई।

मार्च आते ही जमीनी कारोबार पर पंख लग जाते थे। वजह एक अप्रैल से लागू होने वाली गाइड लाइन होती थी। केंद्रीय मूल्यांकन समिति हर बार संपत्ति की कीमत निकालकर गाइड लाइन बढ़ा देती थी। जो 10 से 25 प्रतिशत तक का अंदर होती था, लेकिन इस बार सरकार के सख्त निर्देश के चलते न के बराबर गाइड लाइन बढ़ाई गई। उसका चौंकाने वाला असर रजिस्ट्रार ऑफिस के कामकाज पर पड़ रहा है।

इसके अलावा केंद्र सरकार ने भी जीएसटी में एक बड़ा फैसला कर दिया। फ्लैटों की रजिस्ट्री पर अब तक 18 प्रतिशत का जीएसटी लगता था, लेकिन उसे संशोधित करते हुए पांच प्रतिशत कर दिया गया। इसमें सीधा फायदा अब बिल्डिर को होगा उसे 13 प्रतिशत का जीएसटी नहीं चुकाना होगा। इस फैसले से उनकी दीपावली हो गई जिसका असर रजिस्ट्रार की कमाई पर हो रहा है। उन्होंने अपने सभी ग्राहकों की रजिस्ट्री को रोक दिया। उन्हें सहूलियत देते हुए अप्रैल में पैसा जमा कराने की छूट दे दी। हालांकि लोन वाले प्रकरणों में उन्हें मजबूरी में रजिस्ट्री करना पड़ रहा है, क्योंकि बैंक को भी अपना टारगेट पूरा करना है।

1340 करोड़ का है लक्ष्य
जिला पंजीयक को सरकार ने 1340 करोड़ की कमाई का लक्ष्य दे रखा है जिसमें से एक बड़ा हिस्सा उसने हासिल भी कर लिया। वर्तमान में विभाग एक हजार करोड़ से अधिक की कमाई कर चुका है। उसे आशा है कि 20 दिन में वे 12 सौ करोड़ तक पहुंच जाएंगे। गौरतलब है कि पिछले वर्ष सरकार ने 1149 करोड़ रुपए की रजिस्ट्री में कमाई की थी।