इंदौर

किसान नहीं बनना चाहते ग्रामीण युवा

चिंता: ‘असर’ रिपोर्ट के विश्लेषण में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

3 min read
Jan 27, 2018

इंदौर. केंद्र सरकार ने यदि कृषि क्षेत्र के विकास के लिए तुरंत जरूरी कदम नहीं उठाए तो आशंका है कि आने वाले वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों के युवा कृषि कार्यों के लिए तैयार ही न हों। गैर लाभकारी संगठन प्रथम की ओर से हाल ही में जारी एनअुल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) में इस बात के संकेत मिल रहे हैं। १८ वर्ष के अधिकांश युवा कृषि क्षेत्र में कार्य करने के इच्छुक नहीं हैं और अन्य क्षेत्रों में अपना भविष्य संवारना चाहते हैं।

कृषि से जुड़े ग्रामीण परिवारों के युवाओं पर अक्सर कृषि क्षेत्र में ही भविष्य तलाशने के लिए दबाव बनाया जाता है, लेकिन उनमें से कई सेना, पुलिस, इंजीनियरिंग, अध्यापन जैसे क्षेत्रों में जाने को प्राथमिकता देते हैं। १४ से १८ वर्ष के करीब ४२ फीसदी ग्रामीण युवा शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने के बावजूद कामकाज में जुटे हैं और इनमें से ७९ फीसदी कृषि क्षेत्र में कार्यरत हैं। २८ राज्यों में ३० हजार ग्रामीण युवाओं पर हुए इस सर्वेक्षण के मुताबिक करीब एक तिहाई से अधिक युवा कृषि क्षेत्र में कार्यरत हैं। सिर्फ १.२ फीसदी युवा किसान बनना चाहते हैं, जबकि १८ फीसदी लडक़े सेना- पुलिस और १२ फीसदी इंजीनियर बनना चाहते हैं।

लड़कियों की पसंद अध्यापन
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों की २५ फीसदी युवा लड़कियां अध्यापन कार्य और १८ फीसदी डॉक्टर या नर्स बनना चाहती हैं। यही नहीं, १३ फीसदी लडक़े व ९ फीसदी लड़कियों ने ‘किसी भी सरकारी नौकरी’ में जाने की इच्छा व्यक्त की है। इस सर्वे के परिणाम उस वक्त सामने आए हैं जब देशभर में किसान प्रदर्शन हो रहे हैं। वर्ष २०१४-१५ से २०१७-१८ के मध्य औसत कृषि वृद्धि दर २ फीसदी से कम रही है, जो कि कृषि के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

किसान परिवारों की मासिक आय में नहीं हो रही वृद्धि
असर की रिपोर्ट पर कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण युवा इसलिए कृषि क्षेत्र में जाने के इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि कृषि में लाभ व आय लगातार कम होती जा रही है। यह एक तरह से घाटे का उद्योग बनता जा रहा है। निम्न स्तर की सरकारी नौकरी में भी 20-२२ हजार रुपए मासिक मिलते हैं। वहीं, कई किसान परिवार ऐसे हैं जिनकी मासिक आय ३८०० रुपए प्रतिमाह ही है। विशेषज्ञ सवाल करते हैं कि ऐसे में कौन कृषि करना चाहेगा, जिसमें मेहनत ज्यादा और लाभ कई गुना कम है? केंद्र सरकार के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं। एनएसएसओ की वर्ष २०१३ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कृषि परिवारों की कुल मासिक आय 6,426 रुपए थी। इसमें से खेती और पशुधन से मासिक आय का हिस्सा सिर्फ 3,844 रुपए का था, यानी शेष 40 फीसदी आय गैर-कृषि माध्यमों से अर्जित करते हैं।

कृषि व पशुधन पढ़ाई का रुझान नहीं
सर्वेक्षण करने वाली संस्था ‘प्रथम’ के एक शीर्ष अधिकारी बताते हैं कि देश के कुल अंडरग्रेजुएट छात्रों में से ०.५ फीसदी से भी कम छात्र कृषि व पशुधन कोर्सों में नामांकित हैं। हालांकि, भारत में कृषि व संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाली आबादी घटकर ५० फीसदी तक पहुंच गई है। ऐसे परिदृश्य में कृषि व पशुधन एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें और अधिक व प्रशिक्षित कार्यबल का उपयोग किया जा सकता है। इससे युवाओं को रोजगार के साथ ही कृषि उत्पादन व आय में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और इससे संबंधित प्रसंस्करण उद्योगों में "मशीनीकृत या वैज्ञानिक’ तौर पर कृषि को बढ़ावा देने के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिससे निकट भविष्य में कृषि में अधिक लाभ की प्रबल संभावनाएं हैं।

वर्ष 2014 में एक निजी संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक, 60 फीसदी किसान नौकरी के लिए खेती छोडऩे को तैयार थे, जबकि 18 फीसदी ही अपने बेटों को कृषि में शामिल करने के इच्छुक नजर आए थे।

Published on:
27 Jan 2018 10:44 am
Also Read
View All

अगली खबर