धारा 16 के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देती हुई 40 से अधिक रिट पिटिशन विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित है।
इंदौर. टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन व इंदौर सीए शाखा के तत्वावधान में जीएसटी में हुए बदलाव और उनके प्रभाव विषय पर वेबिनार का आयोजन हुआ। मुख्य वक्ता सीए कीर्ति जोशी ने बताया, जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर धारा 16 के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देती हुई 40 से अधिक रिट पिटिशन विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित है। एक जनवरी से एक बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत किसी सप्लायर को चुकाए गए जीएसटी की इनपुट टैक्स की क्रेडिट व्यापारी को तभी मिल सकेगी, जब सप्लायर ने उसका जीएसटीआर-1 भरा हो और उसकी डिटेल्स करदाता के जीएसटी-2बी में दिख रही हो।
समय पर रिटर्न भरना जरूरी
जोशी ने बताया कि आने वाले समय में व्यापारियों को कई तरह की समस्या से जूझना होगा जैसे कि यदि किसी सप्लायर ने समय पर उसका रिटर्न नहीं भरा तो खामियाजा खरीदार व्यापारी को भुगतना होगा। ऐसे में कई बड़े व्यापारी खरीदी गई वस्तु का भुगतान छोटे सप्लायर को तब तक नहीं करेंगे, जब तक कि वह जीएसटी रिटर्न नहीं दाखिल कर देता। इसमें ऐसे छोटे व्यापारियों के सामने वर्किंग कैपिटल की समस्या बढ़ जाएगी, क्योंकि उनकी उधार बिक्री बढ़ेगी।
नए कानून में खरीदार व्यापारी को सुनवाई का भी मौका नहीं
सीएम कीर्ति जोशी ने बताया कि जब जीएसटी कानून आया था, तब भी इसी प्रकार की व्यवस्था प्रस्तावित थी, लेकिन उसमे वस्तु क्रय करने वाले व्यापारी के पास भी विकल्प था कि यदि सप्लायर ने उसके द्वारा दाखिल रिटर्न में ऐसी डिटेल्स देना भूल गया है या गलत दे दी है तो वे अपने बिल की डिटेल्स दर्ज करा सकते थे, जिसे सप्लायर को कन्फर्म करना होता था। इस व्यवस्था में व्यापारी को एक मौका मिलता था, लेकिन नए कानून में खरीदार व्यापारी को सुनवाई का कोई मौका नहीं दिया गया है। वेबिनार का संचालन सीए कृष्ण गर्ग ने किया। स्वागत उद्बोधन टीपीए अध्यक्ष सीए शैलेंद्र सिंह सोलंकी ने दिया। इस अवसर पर टीपीए के मानद सचिव सीए अभय शर्मा व सीए सुनील पी.जैन मौजूद थे।