लोगों में अब संक्रमण के डर से प्रिकॉशन डोज को लेकर भी उत्साह नहीं है....
इंदौर। शहर में पिछले दो वर्ष से मंडरा रहा कोरोना का संकट लगभग खत्म हो गया है। संक्रमण का खतरा भी न के बराबर है। कोरोना पॉजीटिव व एक्टिव मरीज शून्य हो चुके हैं। लोगों में अब संक्रमण के डर से ‘प्रिकॉशन डोज’ को लेकर भी उत्साह नहीं है। स्थिति यह है कि गिनती के लोग भी टीकाकरण केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं। विभाग ने भी वैक्सीन स्टॉक रखना बंद कर दिया है। विभाग के स्टोर रूम में कोविशिल्ड के मात्र 350 डोज ही है। अधिकारी
माना जा रहा है कि इतने डोज ही करीब 15 से 20 दिन तक चल जाएंगे। इंदौर ने एक दिन में एक लाख लोगों के टीकाकरण का कीर्तिमान रचा है। शहर के 28 लाख लोगों का टीकाकरण भी इंदौर में सबसे पहले किया गया था। टीकाकरण में भी इंदौर ने नंबर वन रहा था। अब भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा संक्रमण की स्थिति पर नजर बनाए रखने के लिए नियमित रूप से 100 से 150 सैंपल की जांच करवाई जा रही है। इसमें मात्र 15 से 20 ही पॉजीटिव सामने आ रहे हैं जो कि एसिम्टमैटिक यानी बगैर लक्षण वाले थे। वहीं, सोमवार को कोरोना का एक भी मरीज सामने नहीं आया। उधर, एक्टिव मरीज भी अब एक भी नहीं है।
नहीं दिख रहा उत्साह
डॉ. तरूण गुप्ता, जिला टीकाकरण अधिकारी का कहना है कि आम जनमानस में अब कोरोना को लेकर डर करीब खत्म हो चुका है। केस भी न के बराबर रह गए हैं। यही वजह है कि कोरोना वैक्सीन के तीसरे डोज को लेकर ज्यादा लोगों ने उत्साह नहीं दिखाया। स्टॉक में फिलहाल कोवैक्सीन के 30 हजार डोज उपलब्ध है जिन्हें अब जिलों में भेजने पर विचार चल रहा है।
14 प्रतिशत को डोज
जितने लोगों ने पहला व दूसरा डोज लगवाया है, उसके मुकाबले मात्र 16 प्रतिशत ने ही प्रिकॉशन डोज लिया है। जनवरी 2020 से अब तक 32 लाख 13 हजार लोगों ने पहला डोज लिया है। यह लक्ष्य से 11 प्रतिशत अधिक रहा। वहीं, 30 लाख 31 हजार लोगों ने दूसरा डोज लिया जो लक्ष्य से 6 प्रतिशत कम था। प्रिकॉशन डोज मात्र 4 लाख 87 हजार लोगों को लगा जो लक्ष्य के 86 प्रतिशत कम हैं।