
पुलिस कमिश्नर का भी आदेश नहीं मान रहा क्राइम ब्रांच
इंदौर. क्राइम ब्रांच ( Crime Branch) के अधिकारी वरिष्ठ अफसरों के निर्देश को भी नहीं मान रहे हैं। हाल के विवाद के बाद कमिश्नर के निर्देश पर एडिशनल कमिश्नर ने एसआइ को लाइन अटैच करने का आदेश जारी किया था, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें रिलीव नहीं किया और उनसे क्राइम ब्रांच की डीएसबी में काम करवा रहे हैं।
अमरीकी लोगों से धोखाधड़ी करने के आरोपी करण को हवालात में रखने की बात पर टीआइ धनेंद्रसिंह भदौरिया व एसआइ लोकेंद्र के बीच विवाद हुआ था। पहले टीआइ और फिर अगले दिन एसआइ को लाइन अटैच किया गया। लोकेंद्र क्राइम ब्रांच के वरिष्ठतम अफसर का नजदीकी बताया गया है। उपशाखा डीएसबी में पदस्थ करने का आदेश निकालकर उससे क्राइम ब्रांच में ही काम कराया जा रहा था, लेकिन विवाद हुआ तो एडिशनल कमिश्नर राजेश हिंगणकर ने उसे लाइन अटैच करने का आदेश जारी किया। धोखाधड़ी की जांच भी निरीक्षक आरती को सौंपी गई। आदेश तो जारी हो गया, लेकिन एसआइ अब भी क्राइम ब्रांच में ही सक्रिय है। डीसीपी निमिष अग्रवाल का कहना है, पहले से लोकेंद्र डीएसबी में था और अब वहीं काम कर रहा है। हालांकि, उसे लाइन भेजने के आदेश दिए गए थे, लेकिन पालन नहीं हुआ। पुलिस कमिश्नर हरिनारायणाचारी मिश्र (Harinarayanachari Mishra) ने आदेश नहीं मानने को गंभीरता से लिया है। मिश्र का कहना है, एसआइ लोकेंद्र को लाइन अटैच किया है तो उससे डीएसबी में ही रखना गलत तरीका है। मैं इस मामले में जानकारी ले रहा हूं, उसे लाइन में ही काम करना होगा।
इसलिए आ जाते क्राइम ब्रांच
गंभीर अपराध सुलझाने का जिम्मा क्राइम ब्रांच के पास है, लेकिन कोई बड़ा मामला सामने नहीं आ रहा है। चर्चा है, क्राइम ब्रांच के कर्मचारी जुआ-सट्टा और अन्य आर्थिक गतिविधियां करने वालों से लाखों रुपए महीने की बंदी उगाते हैं और यही कारण है कि घूम फिर कर क्राइम ब्रांच आ जाते हैं। सियागंज के व्यापारियों ने मिलावट के नाम पर वसूली का आरोप लगाया तो सबसे पहले क्राइम ब्रांच ही कटघरे में आई थी, लेकिन जिम्मेदारों ने किसी पर कार्रवाई नहीं की।
Published on:
10 Jul 2022 01:46 am
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