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बीमार ससुर के कारण घूमने नहीं जा पा रही सॉफ्टवेयर इंजीनियर बहू उन्हें देने लगी धीमा जहर, पति ने ही पकड़ा

बीमार ससुर की देखभाल की जिम्मेदारी के कारण घूमने नहीं जा पाने से परेशान बहू ने भोजन में धीमा जहर देकर उन्हें मारने की साजिश रची।

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crime news

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इंदौर. बीमार ससुर की देखभाल की जिम्मेदारी के कारण घूमने नहीं जा पाने से परेशान बहू ने भोजन में धीमा जहर देकर उन्हें मारने की साजिश रची। पति को शंका हुई तो उन्होंने पिता के ब्लड की जांच कराई। पत्नी के फोन कॉल की रिकॉर्डिंग सुनी तो शक पुख्ता हुआ। पति-पत्नी दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वहीं, ससुर रिटायर्ड बैंक ऑफिसर हैं। मई २०१७ से बहू यह हरकत कर रही थी, लेकिन अब जाकर मामले का खुलासा हुआ।

तिलकनगर पुलिस ने गोयल नगर निवासी अमित श्रीवास्तव की शिकायत पर उसकी पत्नी अनीता पांडेय के खिलाफ धारा 328 के तहत केस दर्ज किया है। टीआई सोमा मलिक की टीम मामले में छानबीन कर रही है। दोनों ने करीब सात साल पहले प्रेम विवाह किया था। उनकी साढ़े चार साल की बेटी भी है। अमित के पिता विनोद श्रीवास्तव दो साल से अमित के साथ हैं। अमित के भाई अभिषेक दिल्ली में हैं। पिता कभी दिल्ली जाकर भी रहते हैं। बीमार पिता को साथ रखने को लेकर अमित व उनकी पत्नी के बीच अकसर विवाद होते थे।

अमित के मुताबिक, कुछ साल पहले मां का निधन हो चुका है। शादी के बाद से उनकी पत्नी का माता-पिता के साथ व्यवहार ठीक नहीं था। पिता की लगातार बीमारी से शक हुआ। अमित ने बताया, शक होने पर पिता का एसआरएल रैनबेक्सी लैब में मरक्यूरी ब्लड टेस्ट कराया, जिसमें मरक्यूरी की पुष्टि हुई। उन्हें लगा कि पारद गोली के रूप में धीमा जहर दिया जा रहा है। इसके बाद अमित ने पत्नी के मायके वालों के साथ फोन पर होने वाली बातों की रिकॉर्डिंग कर उन्हें सुना। बातचीत में पत्नी ससुर को जहर देने को लेकर चर्चा कर रही है। प्रारंभिक पूछताछ में बहू ने जहर देने से इनकार किया है।

हर जनसुनवाई में आती है 25 शिकायतें
बुजुर्गों के अपने परिवार से परेशान होने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सीनियर सिटीजन पंचायत के प्रभारी एएसपी डॉ. प्रशांत चौबे के मुताबिक, हर सप्ताह जनसुनवाई में करीब 25 बुजुर्ग बेटा-बहू व अन्य रिश्तेदारों द्वारा परेशान करने की शिकायतें लेकर आते हैं। जिले में महीने में करीब 300 शिकायतें ऐसी आती हैं, जिनमें काउंसलिंग कर मदद की जाती है।

कई चक्कर लगाने के बाद हुआ केस दर्ज
मई 2017 में शंका होने पर अमित ने अपने स्तर पर स्टिंग कर सच्चाई को सामने लाने का प्रयास किया। वे शिकायत लेकर तत्कालीन टीआई के पास भी गए, लेकिन उन्होंने मदद नहीं की। अब फिर से वरिष्ठ अफसरों तक शिकायत पहुंचाई तो केस दर्ज हुआ।

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