
आवारा कुत्तों से नहीं मिल रही मुक्ति, स्मार्ट सिटी कंपनी और आइडीए कठघरे में
इंदौर. शहर में आवारा कुत्तों के आतंक से मुक्ति दिलाने को लेकर हाई कोर्ट में करीब ६ साल से विचाराधीन जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई।
जस्टिस एससी शर्मा व जस्टिस वीरेंद्रसिंह की बेंच में याचिकाकर्ता द्वारा आवेदन पेश कर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कंपनी, आइडीए और प्रदेश के वेटरनरी डिपार्टमेंट के प्रमुख सचिव को पक्षकार बनाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने आवेदन स्वीकार कर तीनों को पक्षकार बनाने के आदेश दिए। 4 अप्रैल को अगली सुनवाई में तीनों पक्षों को संभवत: नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जाएगा। एडवोकेट अमिताभ उपाध्याय ने कहा, इंदौर को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल किया गया है। योजना के में शहर से आवारा कुत्तों को हटाने एवं उनकी नसबंदी के प्रावधान किए गए हैं, इसलिए स्मार्ट सिटी कंपनी को पक्षकार बनाना जरूरी है। कंपनी को आइडीए भी सुझाव देगा, इसलिए उसे भी पक्षकार बनाया गया है। याचिका में आवारा कुत्तों के आतंक को नियंत्रित करने की मांग की गई है।
रोजाना 200 से ज्यादा मरीजों को लगते हैं रैबिज इंजेक्शन
शहर में आवारा कुत्तों के शिकार लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में रैबिज इंजेक्शन की सुविधा की बात करें तो सारा जिम्मा हुकुमचंद पॉली क्लीनिक पर ही है, यहां रोजाना 200 से 250 मरीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं। कुत्तों के काटने पर रैबीज के पांच इंजेक्शन का डोज लगवाना पड़ता है, इसके लिए एक माह की अवधि में पांच बार तक अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं। मौसम में बदलाव के साथ कुत्ते ज्यादा आक्रमक हो जाते हैं और काटने के मामले बढ़ जाते हैं।
शहर में 80 हजार आवारा कुत्ते
आंकड़ों की मानें तो शहर में 80 हजार आवारा कुत्ते हैं पर उनकी बढ़ती संख्या को लेकर नगर निगम लापरवाह है। इसी मुद्दे को लेकर 2013 से विचाराधीन जनहित याचिका पर पूर्व में कोर्ट द्वारा कहा गया था, क्या इंसानों से ज्यादा पशुओं की जान मायने रखती है। कोर्ट ने निगम को कुत्तों के नियंत्रण को लेकर पिछले तीन साल में निगम ने क्या कदम उठाए हैं, उसकी रिपोर्ट शपथ पत्र के साथ पेश करने को कहा था पर रिपोर्ट अब तक पेश नहीं की गई। कोर्ट ने एमवाय अधीक्षक व सीएमओ को भी कुत्तों का शिकार लोगों के उपचार की व्यवस्था करने के आदेश दिए हैं।
Published on:
16 Mar 2019 01:21 pm
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