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मरीजों की जान खतरे में डाल सालगिरह मनाने निकल गए डॉक्टर दंपती

- नौलखा स्थित आरोग्य हॉस्पिटल का मामला, स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची तब भी नहीं मिला कोई डॉक्टर

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लखन शर्मा, इंदौर. शहर में निजी अस्पतालों में भारी लापरवाही हो रही है। अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन तो एमबीबीएस डॉक्टरों ने नाम पर हो रहे हैं, लेकिन उनमें एमबीबीएस डॉक्टर नहीं रहते। नवलखा स्थित आरोग्य हॉस्पिटल का एक ऐसा ही मामला स्वास्थ्य विभाग के पास पहुंचा है। जहां डॉक्टर दंपती ने मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर लिया और सालगिरह मनाने के लिए स्टॉफ के भरोसे छोड़ शहर से बाहर घूमने निकल गए। इस दौरान अस्पताल में आई एक युवती को भी अस्पताल के डॉक्टरों के लेटर पेड पर जांच और दवाईयां लिख दी गई। इंजेक्शन तक लगा दिया गया। बाद में परिजन ने सीएमएचओ को शिकायत की तो जांच करने स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची। तब भी वहां ६ मरीज भर्ती थे और डॉक्टर एक भी नहीं।

यह था मामला

आरोग्य अस्पताल में एक युवती पेट दर्द का इलाज कराने पहुंची। यहां इस समय एक युवती जिसने खुद को डॉक्टर बताया और युवती को देखने के बाद पीलिया होना बताया व एक इंजेक्शन लगवा दिया। अस्पताल की संचालक डॉ. प्रीति त्रिवेदी व डॉ. लोकेश त्रिवेदी के लेटरपेड पर दवाईयां व जांच लिख दी। जब मरीज युवती का परिजन आयुष अग्रवाल मेडिकल पर दवाई लेने पहुंचा तो मेडिकल संचालक ने बताया की अस्पताल में तो डॉक्टर ही नहीं है, ये दवाई किसने लिख दी। बाद में आयुष अस्पताल पहुंचा और जमकर हंगामा किया। तब जिस युवती ने दवाई लिखी थी, वह भी चली गई और अस्पताल में सिर्फ स्टॉफ था। जबकि इस दौरान अस्पताल में मरीज भी भर्ती थे। आयुष ने यहीं से सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जडिय़ा को इसकी शिकायत की और पूरा मामला बताया।

मरीज भर्ती और डॉक्टर कोई नहीं

22 फरवरी को डॉ. जडिय़ा के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम आरोग्य अस्पताल का दौरा करने पहुंची। अस्पताल में इस समय एक भी एमबीबीएस डॉक्टर नहीं था, जबकि 4 बच्चों सहित 6 मरीज भर्ती थे। टीम के सामने डॉक्टर दंपती की मां आ गई और वही युवती सामने आई, जिसने दवा लिखी थी। उसने खुद को बीएचएमएस होना बताया। टीम ने जब उससे डिग्री मांगी तो दिखा न सकी। टीम करीब आधे घंटे से अधिक समय तक रुकी, भर्ती मरीजों के बयान लिए, तब तक वहां कोई एमबीबीएस डॉक्टर नहीं आया।

दे दी जांच रिपोर्ट

टीम ने कल सीएमएचओ को इस मामले की पूरी जांच रिपोर्ट सौंप दी। जिसमें स्पष्ट है कि दौरे के दौरान अस्पताल में मरीज भर्ती थे, लेकिन कोई भी डॉक्टर नहीं था। इसके बाद अब सीएमएचओ द्वारा अस्प्ताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया जा रहा है। अस्पताल डॉ. प्रीति त्रिवेदी के नाम रजिस्टर्ड है, जो स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। वहीं उनके पति डॉ. लोकेश त्रिवेदी शिशु रोग विशेषज्ञ हैं। दोनों अपनी सालगिरह पर घूमने गए थे। उधर अब अस्पताल प्रबंधन द्वारा शिकायतकर्ता पर मामले को रफा-दफा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जिससे वह भी कुछ बोलने से बच रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम के दौरा करने के बाद पुरा मामला रिकार्ड पर आ गया है। जिससे अस्पताल का लायसेंस निरस्त हो सकता है।

पहली बार हुई है गलती

हमारी सालगिरह थी, इसलिए हम घूमने निकल गए थे। हम तो मरीजों की सेवा करते हैं। पहली बार हमसे गलती हुई है। हमने शिकायतकर्ता से बात कर ली है।
- डॉ. लोकेश त्रिवेदी, अस्पताल संचालक

प्रबंधन पर होगी कार्रवाई

हमने जांच समिति बनाकर अस्पताल का दौरा करवाया था। उस समय वहां ४ बच्चों सहित ६ मरीज भर्ती थे, लेकिन कोई भी एमबीबीएस डॉक्टर नहीं था। एक युवती जो खुद को बीएचएमएस बता रही थी वह भी अपनी डिग्री नहीं दिखा पाई। हम प्रबंधन को आज नोटिस जारी कर रहे हैं, नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. प्रवीण जडिय़ा, सीएमएचआ

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