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गैस किट वाली स्कूल वैन चलते-फिरते बम जैसी है

कब मिलेगामासूमों को न्याय

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इंदौर. डीपीएस हादसे के बाद परिवहन विभाग ने स्कूली बसों पर सख्ती की, लेकिन गैस किट से चलने वाली स्कूल वैनों को छोड़ दिया। वहीं, ग्वालियर में हुए हादसे के बाद मप्र राज्य बाल संरक्षण आयोग ने बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवहन आयुक्त डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव को पत्र लिखकर कहा, गैस किट से चलने वाली स्कूली वैन चलते फिरते बम जैसी होती हैं। एेसे में बच्चों की जान से खिलवाड़ नहीं कर सकते। ऐसी वैनों को तुरंत बंद किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन हो
आयोग ने स्कूलों में डीजल-पेट्रोल से चलने वाले और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करने वाले वाहनों को ही परमिशन देने की सिफारिश की है। आयोग के सदस्य ब्रजेश चौहान का कहना है, ग्वालियर में स्कूल वैन में आग लगने की घटना में 11 बच्चे झुलस गए थे। इसमें गैस किट लगी थी। उनका कहना है, स्कूलों का नया सत्र एक अप्रैल से शुरू होगा। उस दौरान तेज गर्मी पड़ेगी। एेसा हादसा कहीं भी न हो, इसके लिए सतर्कता जरूरी है। सूत्रों की मानें तो परिवहन विभाग द्वारा मामले में एक जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उक्त रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी। इंदौर में 500 गैस किट वाली वैन का संचालन हो रहा है।

कलेक्टर के स्कूल बसों को लेकर आदेश पर लगी रोक

दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बस हादसे के बाद कलेक्टर द्वारा स्कूल संचालकों और लोक परिवहन संचालन के लिए दिए आदेश पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी। कोर्ट ने कलेक्टर द्वारा दिए आदेश पर कार्रवाई नहीं करने को कहा। जस्टिस पीके जायसवाल और जस्टिस वीरेंदर सिंह की पीठ के समक्ष अनएडेड सीबीएसई स्कूल एसोसिएशन की रिट अपील पर मंगलवार को सुनवाई हुई। एडवोकेट गौरव छाबड़ा के मुताबिक कलेक्टर ने सभी स्कूलों को स्कूल संचालन के लिए एक शपथ-पत्र जमा करने के आदेश दिए हैं, इस शपथ-पत्र में कई ऐसे बिंदु हैं, जिनके लिए स्कूल प्रिंसिपल और संचालकों को जिम्मेदार बताया जा रहा है, जो गलत है। शपथ पत्र के खिलाफ एकल पीठ में दायर याचिका निराकृत होने के बाद अपील की। कोर्ट ने तर्क सुनने के बाद कहा है, जब तक एकल पीठ की याचिका का निराकरण नहीं हो जाए, तब तक जिला प्रशासन धारा 144 के तहत कार्रवाई न करे। याचिका में लोक परिवहन संचालन को लेकर कलेक्टर का आदेश भी शामिल है।