संस्था सहस्त्रार ने किया दो नाटकों का मंचन
इंदौर. संस्था सहस्त्रार ने रविवार को दो नाटक ‘सन् 2025’ और ‘इल्हाम’ का मंचन किया। रवीन्द्र नाट्य गृह में आयोजित इन दोनों नाटकों के माध्यम से कलाकारों ने असल जिंदगी के कुछ किस्सें और जिम्मेदारियों के बारे में बताया। दोनों ही नाटकों में कलाकारों ने बहुत अच्छा मंचन किया है और मौजूद दर्शकों को एक सामाजिक संदेश देने की भी कोशिश की गई।
रहस्यमय जीवन की परतों को किया उजागर
‘सन् 2025’ पीयूष मिश्रा द्वारा लिखा गया नाटक है जो फ्रेडरिक ड्यूरेनमेट के नाटक इंसीडेंट एट ट्वीलाइट का रूपांतरण है। दो पात्रों का यह नाटक एक लेखक के रहस्मय जीवन और उसके लेखन की विभिन्न परतों को उजागर करता है। जिसमें एक जासूस गडग़ड़ सूफी लेखक के पास उसके विभिन्न उपन्यासों और उनमें हुई हत्याओं को असल जिंदगी में हुई हत्याओं से जोडक़र साबित करने की कोशिश की जाती हैं। नाटक में दोनों के बीच हुए संवादों से उस हत्यारे द्वारा की गई विभत्स हत्याओं से एक-एक कर पर्दा उठता है और अपराधी सामने आता है। समय के साथ गंभीर होते हुए संवादों के माध्यम से आगे बढ़ता हुआ यह नाटक यथार्थ का एक नया चेहरा दिखाता है और समाज को अपराध का एक नया आइना देखने पर भी मजबूर कर देता है। दर्शकों ने इसे नाटक को खूब सराहा।
नाटक : सन् 2025
लेखक : पीयूष मिश्रा
निर्देशक : तपन शर्मा
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मनुष्य के विचार, प्रभाव और मनोविज्ञान का लाइव चित्रण
इल्हाम का अर्थ अंतज्र्ञान, आत्मबोध या आत्मचिंतन होता है। यह नाटक भगवान नाम के किरदार पर केंद्रित है जो अपने जीवन में सत्य और असली परमानन्द कि ओर खींचा चला जा रहा है किन्तु भौतिक जीवन और उसकी जिम्मेदारियां उसे बांधे रखती है। अपने इस सफर के चलते भगवान नाम के किरदार को समाज एवं परिवार कि निगाह में विक्षिप्त एवं पागल समझा जाता है। यह नाटक पूर्ण रूप से मनुष्य के विचार, परवरिश, परवरिश के प्रभाव और मनोविज्ञान पर केंद्रित है। यह नाटक सच्चे ज्ञान की खोज के बारे में भी है, जो सामाजिक रूप से स्वीकार्य चीजों से परे कहा जा सकता है।
नाटक : इल्हाम
लेखक : मानव कौल
निर्देशक : तपन शर्मा