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Bhopal Indore Metro: तुर्किए की कंपनी से अनुबंध खत्म करने की कवायद तेज

MP News: इंदौर शहर में मेट्रो ट्रेन का कमर्शियल रन 31 मई को शुरू होने जा रहा है। भोपाल में भी दो से तीन माह में मेट्रो चलाने की तैयारी है। इस बीच इसके ऑनलाइन टिकट फेयर कलेक्शन सिस्टम में तुर्की का पेंच फंस गया है।

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Bhopal indore metro contract with Turkish company

तुर्किए की कंपनी का खत्म होगा अनुबंध (Source: Indore Metro Rail 'X')

MP News:इंदौर शहर में मेट्रो ट्रेन का कमर्शियल रन 31 मई को शुरू होने जा रहा है। भोपाल में भी दो से तीन माह में मेट्रो चलाने की तैयारी है। इस बीच इसके ऑनलाइन टिकट फेयर कलेक्शन सिस्टम में तुर्की का पेंच फंस गया है। इंदौर-भोपाल के मेट्रो प्रोजेक्ट में टिकट फेयर कलेक्शन सिस्टम तुर्की की कंपनी का है। कंपनी एसिस गार्ड के अनुबंध को खत्म करने की कवायद चल रही है। ऐसा हुआ तो किराया कलेक्शन का काम अटक सकता है। ऐसी स्थिति में भारतीय कंपनी को काम दिया जा सकता है। शुरुआती सप्ताह में तो यात्रा फ्री रहेगी, फिर 3 महीने डिस्काउंट रहेगा। ऐसे में शुरुआती दिनों में स्टाफ के जरिए मैन्युअली टिकट व्यवस्था लागू की जा सकती है।

युद्ध में पाकिस्तान के समर्थन को लेकर पूरे देश में तुर्किए(Turkish company) का विरोध हो रहा है। सारे रिश्ते खत्म किए जा रहे हैं। मेट्रो में भी वहां की कंपनी को ठेका देने की बात आई तो विरोध शुरू हुआ। इस कारण से अनुबंध खत्म करने की अटकलें हैं। ऐसी स्थिति में क्या सिस्टम बनेगा, कैसे टिकट फेयर कलेक्शन होगा, इन सवालों का जवाब अभी मेट्रो कॉर्पोरेशन के अफसरों के पास नहीं हैं।

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यह मिला है काम

एसिस गार्ड के जिमे ही ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन यानी किराया लेने की प्रक्रिया का सिस्टम तैयार करने का काम है, जिसमें कार्ड के जरिए किराया लेने के बाद ही गेट खुलना भी शामिल है। कंपनी सिस्टम का मेंटेनेंस भी करेगी इस बीच मेट्रो प्रबंधन ने भारतीय कंपनियों से संपर्क शुरू कर दिया है। ऑनलाइन टिकट फेयर कलेक्शन सिस्टम में देशभर में करीब 30 कंपनियां कार्यरत हैं, उनसे बातचीत की जा रही है। इंदौर में 31 मई को कमर्शियल रन शुरू होता है तो मैन्युअली व यूपीआइ-क्यूआर कोड से सीमित स्थिति में टिकट फेयर कलेक्शन की नीति तय की जा रही है।

इन 4 कदमों पर विचार

1. मप्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली के लिए एक नया टेंडर जारी करे। भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह की अन्य विशेषज्ञ कंपनियां क्यूआर कोड आधारित टिकटिंग सिस्टम, कॉमन मोबिलिटी कार्ड जैसे सेवाएं दे सकती हैं।

2. मौजूदा विवाद के मद्देनजर, सरकार ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता दे सकती है। भारत में भी कई कंपनियां हैं जो इस सिस्टम को डिजाइन, विकसित और स्थापित कर सकती हैं।

3. यूपीआइ-क्यूआर कोड के माध्यम से सीमित डिजिटल भुगतान विकल्पों को लागू किया जा सकता है।

4. मौजूदा सिस्टम का उपयोग अन्य वेंडर द्वारा किया जा सकता है, जो केवल सॉटवेयर और अंतिम एकीकरण प्रदान करें।

अभी पूरे मामले में उच्चाधिकारियों से लगातार चर्चा चल रही है। जो बेहतर और तुरंत का विकल्प होगा वह किया जाएगा। फिलहाल, गंभीर मंथन चल रहा है- अजय गुप्ता, जीएम, मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन

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यह है पूरा मामला

पाकिस्तान ने 9-10 मई की रात को बल्क में जिन ड्रोन से भारत के अलग-अलग शहरों पर हमला किया था, उसमें बड़ी संख्या तुर्की(Turkish company) के ड्रोन थे और उसे एसिस इलेक्ट्रॉनिक कंपनी ने ही तैयार किए थे। ऐसे में अब मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन पर इस कंपनी से अनुबंध खत्म करने का दबाव बढ़ गया है।

इंदौर BRTS में काम कर रहे तुर्किये की कंपनी का ठेका रद्द