
सूखे कचरे से कोयला बनाने वाला देश का पहला शहर बनेगा इंदौर
नितेश पाल/ इंदौर. स्वच्छता में नंबर वन इंदौर शहर न सिर्फ सफाई बल्कि कचरे के निपटान में भी सबसे आगे है। इंदौर एक कदम आगे बढ़ाते हुए सूखे कचरे से कोयला बनाने की तैयार में है। इसके लिए नगर निगम राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम लिमिटेड (एनटीपीसी) के साथ मिलकर ट्रेंचिंग ग्राउंड में प्लांट लगाएगा। यहां बनने वाला कोयला एनटीपीसी के कोल पॉवर प्रोजेक्ट में बतौर ईंधन उपयोग होगा।
एनटीपीसी ने रिसर्च के दौरान कचरे से कोयला बनाने की तकनीक तैयार की है। इसका बड़े स्तर पर पहली बार प्रयोग इंदौर में होगा। निगम देवगुराडिय़ा स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड की जमीन को प्लांट के लिए एनटीपीसी को उपलब्ध कराएगा। लगभग 25 करोड़ की लागत से बनने वाले प्लांट का खर्चा एनटीपीसी उठाएगा। निगम जमीन और आवश्यक सूखा कचरा उपलब्ध कराएगा। शुरुआत में यहां 300 मीट्रिक टन कचरे का प्लांट बनेगा। इसे बाद में बढ़ाकर 500 मीट्रिक टन तक विस्तारित किया जा सकेगा। ये प्लांट 10 महीने में तैयार होगा। जनवरी 2021 से पहले प्लांट काम शुरू कर देगा।
1150 मीट्रिक टन रोजाना कचरा जो इंदौर से निकलता है
600-650 मीट्रिक टन रोजाना गीला कचरा
500-550 मीट्रिक टन रोजाना सूखा कचरा
सूखा कचरा: लगभग 200 मीट्रिक टन सीमेंट कंपनियों को ईंधन के लिए भेजा जाता है।
गीले कचरे का इस्तेमाल: बायोमेथोनाइजेशन के जरिए खाद और गैस बना दी जाती है।
सीमेंट फैक्ट्रियों की भेजते हैं सूखा कचरा
प्लांट में सूखे कचरे के उस हिस्से का इस्तेमाल होगा जो रिसाइकल के लिए नहीं भेजा जा सकता है। निगम ऐसे कचरे को सीमेंट फैक्ट्रियों को भेजता है, जहां पर इसका इस्तेमाल ईंधन में होता है, लेकिन कचरे से निकलने वाली गैस हवा में मिलती है।
बगैर ईंधन के चलेगा प्लांट
एनटीपीसी के रिसर्च एंड डवलपमेंट ब्रांच ने कचरे से कोयला बनाने की तकनीक वेस्ट टू कोल पेलेट्स (डब्ल्यूटीसीपी) तैयार की है। सूखे कचरे को प्लांट में उच्च तापमान पर जलाया जाएगा। कचरा कोयले के पावडर में बदल जाएगा। प्लांट के दूसरे हिस्से में मौजूद पेलेट्स मशीन कोल पावडर से कोयले के पेलेट्स (नालीदार कोयला) बनाएगी। इसका उपयोग खंडवा के मूंदी में स्थित सिंगाजी पॉवर प्लांट में होगा, जहां बिजली बनती है। इंदौर में जो प्लांट लगाया जा रहा, उसे शुरू करने में ईंधन की जरूरत होगी लेकिन प्लांट के शुरू होने के बाद ईंधन की जरूरत नहीं होगी। कचरे के गर्म होने से जो गैस निकलेगी, उसी गैस का उपयोग करते हुए इस प्लांट को चलाया जाएगा।
कोयले के बराबर की रहेगी हीटिंग
कचरे से बनने वाले कोयले की हीटिंग क्षमता 4000 डिग्री सेंटीग्रेड से 5000 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगी जो कि प्राकृतिक कोयले की क्षमता के लगभग बराबर है। कचरा जलने पर निकलने वाली गैस की मात्रा कम होगी।
कार्बन क्रेडिट में होगा इस्तेमाल
यह प्लांट नगर निगम के कार्बन क्रेडिट का बड़ा साधन बनेगा। कचरे का इस्तेमाल बिजली बनाने में होगा, जिससे भी कार्बन क्रेडिट मिलेंगे।
जीरो वेस्ट डिस्पोजल सिटी बन जाएगा
एनटीपीसी के साथ चर्चा हो चुकी है। जल्द ही प्लांट का काम शुरू होगा। अभी हम गीले कचरे का ही पूरा इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद हम सूखे कचरे का भी इस्तेमाल कर उसे पूरी तरह से खत्म कर देंगे। इससे हम जीरो वेस्ट डिस्पोजल सिटी बन जाएंगे। - आशीष सिंह, आयुक्त नगर निगम
Published on:
19 Mar 2020 08:23 am
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