
कभी 15 रुपए तोला बिकता था सोना, अब रंग भी बदलता है, जानिए कुछ रोचक तथ्य
इंदौर. धनतेरस के दिन सोने की खरीदी को लेकर विशेष उत्साह होता है। शहर का सराफा रेड कार्पेट के साथ ग्राहकों की अगवानी के लिए तैयार है। रूप निखारने की अपनी प्रकृति के अनुरूप देश-दुनिया में सोना साल-दर-साल निखरता ही गया। सोने की कीमत का ग्राफ बीते चार-पांच साल को छोड़ दें तो पूरी सदी में बढ़ती पायदान पर ही रहा। आजादी के समय या चीन-पाकिस्तान आक्रमण के समय कीमतों में कमी आई तो 2012-13 में यह तीस हजारी बनने के बाद कुछ समय नीचे रहा, लेकिन इसके बाद कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा। 1918 में 15-16 रुपए तोला बिकने वाला सोना धनतेरस के दिन 32500 रुपए से भी अधिक में बिकेगा। यह अब तक का सबसे अधिकतम रेट होगा। बावजूद इसके खरीदारों का क्रेज आज भी बरकरार है। भले ही इसका स्वरूप बदल गया। अब तक यह निवेश धातु मानी जाती थी, अब यह क्रेज ज्वेलरी मंे बदल गया है।
महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी अब कनक के आभूषणों की खनक से अपना रौब जमा रहे हैं। सराफा में धनतेरस के दिन सोना-चांदी के आभूषण और कलात्मक एसेसरीज की बिक्री से धनवर्षा होती है। सोने के 100 साल और चांदी के ५० साल के सफर को देखें तो विशिष्ट कहानी सामने आती है। 100 साल में सोने-चांदी की कीमतों में इजाफा ही हुआ है। इसमें सोना ज्यादा फायदे में रहा, जबकि चांदी कुछ दिनों तक बाजार के हाथों में खेलती रही। वर्तमान में कीमत 2013-14 की तुलना में आधी पर आ गई। हालांकि वह दौर बहुत लंबे समय का नहीं था। अब 39-40 हजार रुपए किलो के आसपास बिक रही है।
सराफा बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी और सचिव अविनाश शास्त्री बताते हैं, लोगों का मोह सोने-चांदी की खरीदी से कभी दूर नहीं होगा, इसीलिए इसकी कीमतों ने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा। दुनिया में एक यही ऐसा सुरक्षित निवेश है, जो वर्षों तक फायदे में इजाफा करता रहेगा। इसकी खनक भी कम नहीं होती है। सोने को आकर्षक बनाने के लिए बाजार में अनेक प्रयोग हो रहे हैं।
देश के आजाद होने के साथ कीमत में इजाफा
सोने की कीमत 1917-18 में 15 रुपए तोला से बढक़र 1925 में 18.75 रुपए हुई। करीब 6 साल स्थिरता के दौर के बाद 1935 में सोना 31 रुपए रुपए तोला हो गया। 1947 में देश आजाद हुआ, तब सोना 89 रुपए तोला था और इसी साल यह 99 रुपए तोला तक पहुंचा। चीन व पाक आक्रमण के समय सोने की कीमतों में 40 फीसदी की गिरावट आई और कीमत 119 रुपए के उच्च स्तर से 63 रुपए पर आ गई। इसके बाद सोने की कीमतों ने जो रफ्तार पकड़ी तो पलटकर नहीं देखा और आज तीस हजारी हो गया।
2010 के बाद बना 20 हजारी
सोने की कीमतों में इजाफे की रफ्तार 2005 तक तो धीमी रही। इस दौरान सोने की कीमत 7500 रुपए तोला थी। 2010 तक यह ढाई गुना होकर 20 हजार तक पहुंच गई और अब 32,500 रुपए है। पिछले साल से यह 1700 रुपए अधिक है। हालांकि इस दौरान सोने ने कई उतार-चढ़ाव भी देखे, लेकिन कीमतें लगातार बढ़त की ओर हैं। बीते 11 माह में देखें तो सोने की कीमतों में 5 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम का इजाफा हुआ है।
रंग भी बदलता है सोना
आमतौर पर समझा जाता है कि सोना पीला होता है। आभूषण बनाते समय मिश्र धातु की संरचना को बदलकर सोने को अन्य रंग भी दिए जा सकते हैं। कुछ रंग इस प्रकार हैं-
गुलाबी सोना : मिश्र धातु संरचना में अधिक तांबा जोडक़र गुलाबी सोना बनता है।
हरा सोना : मिश्र धातु संरचना में अधिक जस्ता और चांदी जोडक़र बनाया जाता है।
सफेद सोना : मिश्र धातु संरचना में निकल या पैलेडियम जोडक़र बनाया जाता है।
24 कैरेट होता शुद्ध सोना
जब आभूषण खरीदे या बेचे जाते हैं, तब कीमत की गणना करने से पहले शुद्धता का ही विश्लेषण किया जाता है। सोने का मूल्य उसकी शुद्धता से निर्धारित होता है, जिसे कैरेट में मापा जाता है। सोने का शुद्ध रूप 24 कैरेट (99.99 प्रतिशत) होता है। हालांकि 24 कैरेट सोना नरम होता है, इसलिए मजबूती और डिजाइनिंग के लिए उसमें अन्य धातुओं को मिश्रित किया जाता है। इससे सुंदर डिजाइन तैयार करने में मदद मिलती है। कैरेट जितना अधिक होगा, सोने का आभूषण उतना ही महंगा होगा। सोना 24 से 14 कैरेट तक का होता है।
Updated on:
05 Nov 2018 01:20 pm
Published on:
05 Nov 2018 01:10 pm
बड़ी खबरें
View Allइंदौर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
