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प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर, इसलिए यहीं बने जीएसटी ट्रिब्यूनल

टैक्स प्रैक्टिशनर एसोसिएशन ने सीजीएसटी आयुक्त के समक्ष रखी मांग।

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प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर, इसलिए यहीं बने जीएसटी ट्रिब्यूनल

प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर, इसलिए यहीं बने जीएसटी ट्रिब्यूनल

इंदौर. जीएसटी को लेकर व्यापारी व विभाग के बीच होने वाले विवादों को सुलझाने के लिए सरकार प्रदेश में जीएसटी ट्रिब्यूनल स्थापित करने पर काम कर रही है। चूंकि, प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर है, इसलिए टैक्स प्रैक्टिशनर सीए चाहते हैं कि ट्रिब्यूनल यहीं बने। जीएसटी विभाग भी इसकी पैरवी कर चुका है। साल के अंंत तक ट्रिब्यूनल स्थापित होने की उम्मीद है। वर्ष 2017 में जीएसटी लागू हुआ, लेकिन विवाद निपटाने के लिए अभी तक ट्रिब्यूनल नहीं बन पाया। जीएसटी को लेकर जब भी विवाद की स्थिति बनती है तो मामला जीएसटी कमिश्नर (अपील) के समक्ष रखा जाता है। यहां संतुष्ट नहीं होने पर ट्रिब्यूनल में मामला जाता है। चूंकि, ट्रिब्यूनल नहीं बनी है, इसलिए महत्वपूर्ण व हाई वैल्यू के मामले में हाई कोर्ट की शरण लेना होती है। लेकिन, उसमें कास्ट ज्यादा आती हैै। टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन (टीपीए) प्रतिनिधि मंडल ने सीजीएसटी आयुक्त लोकेश जाटव से मिलकर जीएसटी ट्रिब्यूनल बेंच को इंदौर मेें स्थापित करने की मांग रखी है। इस दौरान टीपीए अध्यक्ष सीए शैलेंद्र सोलंकी व एसजीएसटी सचिव सीए मनोज पी. गुप्ता, सीजीएसटी सचिव कृष्ण गर्ग, जेपी सराफ, सीए अभय शर्मा आदि मौजूद थे।

जीएसटी टीडीएस सीधे खाते में जमा करें
प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त से जीएसटी टीडीएस सीधे करदाता के खाते में जमा करने की भी मांग की। सीए मनोज पी. गुप्ता के मुताबिक, सरकारी एजेंसी के लिए काम करने वाले ठेकेदार का 1 प्रतिशत टैक्स कट जाता है। साथ ही ई कॉमर्स ऑपरटेर का भी जीएसटी टीडीएस लिया जाता है। जबकि, टीडीएस व्यापारी के खाते में सीधे जमा नहीं होता, उसे क्लेम करना होता है। इसलिए, इनकम टैक्स की तरह जीएसटी का टीडीएस भी सीधे खाते में जमा होना चाहिए। आयुक्त ने यह सुझाव जीएसटी काउंसिल को भेजने का आश्वासन दिया है।