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मौत की सड़क: महज चार माह में 30 लोगों की हो गई मौत

महज चार माह में सड़क हादसों में 30 लोगों की मौत हो चुकी है। अधिकांश दुर्घटनाएं तेज गति के कारण होती हैं। हादसे रोकने के लिए लोग यह भी कह रहे हैं कि अब केवल पुलिस की सख्ती से काम नहीं होगा, जनता को भी इसके लिए जागरूक होना पड़ेगा।

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चार माह में सड़क हादसों में 30 लोगों की मौत

भंवरकुआं इंदौर. लोग इसे मौत की सड़क बोलने लगे हैं। भंवरकुआं की रिंग रोड एक्सीडेंट जोन बन रही है। यहां महज चार माह में सड़क हादसों में 30 लोगों की मौत हो चुकी है। अधिकांश दुर्घटनाएं तेज गति के कारण होती हैं। हादसे रोकने के लिए लोग यह भी कह रहे हैं कि अब केवल पुलिस की सख्ती से काम नहीं होगा, जनता को भी इसके लिए जागरूक होना पड़ेगा।

रिंग रोड पर 1 जनवरी से लेकर 11 मई तक लगभग 36 हादसे हुए। इनमें 7 दुर्घटनाओं में तो मामूली चोट आई, लेकिन 29 हादसे इतने भीषण रहे कि 30 लोगों की मौत हो गई। कुछ की मौके पर मौत हुई तो कुछ ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। रिंग रोड पर तीन इमली ओवरब्रिज के नीचे से लेकर पालदा, आइटी चौराहा और वहां से लगभग 500 मीटर दूर एक बड़े अस्पताल के पास ही सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिसमें 10 लोगों की जान चली गई है। इसके अलावा नेमावर रोड पालदा, टॉवर चौराहा, उद्योग नगर, नवलखा चौराहा, खंडवा रोड पर वाइन शाप के पास, तेजाजी चौक पालदा, पीपल्याराव, सीता देवी स्कूल, पॉवर हाउस नवलखा पर भी सड़क दुर्घटनाओं मे 12 लोगों की मौत हो चुकी है।

इसी प्रकार भोलाराम उस्ताद मार्ग, शनि मंदिर के पास सहित नेमावर रोड पर एक पेट्रोल पंप और एक होटल के आसपास भी सड़क हादसे में चार लोगों की जान चली गई है।

इसलिए हो रहे हादसे
भंवरकुआं पुलिस के रेकॉर्ड के अनुसार रिंग रोड पर हॉस्पिटल चौराहे के पास, आइटी चौराहे के आसपास, तीन इमली ओवर ब्रिज व इससे लगे क्षेत्रों में सबसे ज्यादा दुर्घटना होती है। रिंग रोड के किनारे के ढाबे और नेमावर रोड है। इस कारण वाहनों की आवाजाही लगी रहती है। यहां से चोइथराम मंडी से आलू, प्याज भरे ट्रक के साथ ही मेटाडोर सहित अन्य लोडिंग वाहनों का आनाजाना लगा रहता है। स्कूल बसें यहीं से गुजरती हैं। आइटी चौराहे से होकर ही खंडवा की ओर जाने वाली बसें भी आना-जाना करती हैं। सुबह और शाम को तो इतनी भीड़ हो जाती है कि काफी दूर तक रोड जाम हो जाता है। सभी को पहले जाने की जल्दी रहती है। भारी वाहनों के ड्रायवरों को तो इतनी जल्दबाजी रहती है कि थोड़ी सी जगह मिलने पर वाहन आगे ले जाते हैं और संतुलन बिगड़ने पर हादसा होता है।

डीसीपी राकेश सिंह बताते हैं कि वाहन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। प्रमुख चौराहों पर जहां टीम तैनात रहती है, वहीं वाहन चालकों को भी जागरुक किया जा रहा है। जनता को भी सक्रिय रहने की जरूरत है।