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कचोरी साइज के पानी-पुरी के पताशे हैं यहां की पहचान

घनश्याम चाट हाउस 1948 से संचालित हो रहा है। इस दुकान के पताशों की अलग खासियत है। कचोरी साइज के पताशे और कहीं नहीं मिलेंगे।

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special pani puri

special pani puri

लखन@ इंदौर. शहर में खाने-पीने का असली स्वाद पश्चिम क्षेत्र के शहर में खाने-पीने का असली स्वाद पश्चिम क्षेत्र के बाजारों और गलियों में मिलता है। यही कारण है कि आज भी 56 दुकान पर सराफा भारी है। ऐसी ही एक दुकान कपड़ा मार्केट के गोवर्धन चौक पर 40 वर्षों से चल रही है, जहां सिर्फ पानी-पुरी और दही-पुरी मिलती है। कपड़ा मार्केट में कई ग्राहक वर्षों से आ रहे हैं। इनमें से कई जब भी इंदौर आते हैं घनश्याम चाट हाउस पर पानी-पुरी खाने जरूर आते हैं।

दही-पुरी को दिलाई पहचान
इस दुकान ने दही-पुरी को अलग पहचान दिलाई थी। दही-पुरी स्पेशल तरीके से बनाई जाती है, जिसमें दही तो सामान्य रहता है, लेकिन चटनी इमली की होती है। इस तरह की चटनी शहर के अन्य पानी पुरी वालों के यहां नहीं मिलती। यहां वर्षों से एक ही तरह का स्वाद बरकरार रखा गया है, जिससे पानी-पुरी के शौकीन पूरे शहर से यहां आते हैं। कडक़ पताशों के ऊपर मीठा दही और इमली की चटनी के साथ स्पेशल मसाला डालकर इसे सर्व किया जाता है। एक प्लेट खाने के बाद भी यहां लोग संतुष्ट नहीं होते और दूसरी की डिमांड कर ही देते हैं।

अलग हैं पताशे
घनश्याम चाट हाउस 1948 से संचालित हो रहा है। इस दुकान के पताशों की अलग खासियत है। कचोरी साइज के पताशे और कहीं नहीं मिलेंगे। तंबाकू खाने वाले लोग यहां के पताशे नहीं खा सकते, क्योंकि उनका मुंह छोटा होता है और इनका साइज बड़ा। यहां पताशों के साथ दिया जाने वाला पानी भी पुराने तरीके से बनाया जाता है, जिसमें सभी मसालों का टेस्ट आता है। दुकान संचालक घनश्याम शर्मा बताते हैं कि यह उनका पुश्तैनी काम है। उनके पिताजी ने यह दुकान शुरू की थी। पिता के गुजरने के बाद घनश्याम इसे चलाते हैं। घनश्याम ने बताया कि शहर में हजार से ज्यादा स्थानों पर पानी-पुरी मिल जाएगी, लेकिन 40 साल पहले ऐसे दो या तीन ही स्थान थे, इनमें भी सबसे पहले हमारी दुकान थी।

कुछ घंटो में ही हो जाते हैं खत्म
शहर की मिलें बंद हो जाने की वजह से शहर में कपड़ों के कारोबार में पहले की अपेक्षा कमी आई है। इसके चलते कपड़ा बाजार में अब थोक के साथ खेरची व्यापारियों की संख्या भी बढ़ी है। ऐसे में अब व्यापारियों के यहां महिला ग्राहकों की संख्या अधिक होती है। इस दुकान की सबसे ज्यादा ग्राहक भी वे ही हैं। यहां दुकान खुलने के कुछ घंटो में ही पानी-पुरी खत्म हो जाती है और घनश्याम के साथ उनके बेटे का भी हाथ नहीं रुकता जब तक खाद्य सामग्री पूरी खत्म न हो जाए।