
Indore-Nimar High-Speed Corridor
डॉ. आंबेडकर नगर (महू) अश्विन गोस्वामी
Indore-Nimar High-Speed Corridor: इंदौर से निमाड़ (खंडवा) और आगे महाराष्ट्र-दक्षिण भारत तक कनेक्टिविटी को नया आयाम देने वाला एनएच-347बीजी हाई-स्पीड कॉरिडोर अब अंतिम पड़ाव पर है। तेजाजी नगर से बलवाड़ा तक 33.4 किमी लंबी फोरलेन सडक़ का 86-87त्न निर्माण पूरा हो चुका है और इसे दिसंबर 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के पूरा होते ही 2 से ढाई घंटे का सफर सिमटकर महज 1 घंटे में पूरा होगा, जिससे यात्रियों को जाम और खतरनाक घाट मोड़ों से राहत मिलेगी। इंदौर-बलवाड़ा फोरलेन केवल एक सडक़ परियोजना नहीं, बल्कि मालवा-निमाड़ की आर्थिक और धार्मिक जीवनरेखा बनने जा रही है। बस तीन अड़चनें दूर होते ही यह कॉरिडोर विकास की रफ्तार को नई दिशा देगा।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की इंदौर के तेजाजी नगर से बलवाड़ा तक की इस परियोजना का कार्य मेघा इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है, यह तकनीकी चुनिंदा प्रोजेक्टों में ही इस्तेमाल हो रही है। फोरलेन सडक़ के साथ टनल, घाट सुधार और बड़े ब्रिज का काम तेजी से पूर्ण हो रहा है, हालांकि तीन 'क्रिटिकल पॉइंट’ अब भी प्रोजेक्ट की रफ्तार पर ब्रेक लगाए हुए हैं।
इंदौर से बलवाड़ा तक का सफर आगामी दिनों में यात्रियों के लिए रोमांच से भरा साबित होगा। सडक़ का करीब 6 किमी हिस्सा घने जंगल से होकर गुजरेगा। जिससे यात्री सफर के दौरान प्रकृति के रोमांचक नजारों का लुत्फ ले सकेंगे। कुछ हिस्सों में 30 से 50 मीटर ऊंचे पहाड़ों को काटकर रास्ता बनाया गया है। जिससे वर्तमान में घाट क्षेत्र में सफर की दिक्कतों को दूर किया गया है।
प्रोजेक्ट में 24 ब्रिज का निर्माण किया गया है। इसमें सिमरोल क्षेत्र में 500 मीटर और 250 मीटर के दो बड़े वायाडक्ट है। जिनका निर्माण दो पहाड़ों को जोडकऱ किया गया है। वहीं चोरल में 150 मीटर प्रमुख ब्रिज बनाया गया है। वहीं बलवाड़ा में रेलवे लाइन के ऊपर 1.8 किमी लंबा आरओबी का निर्माण भी किया जा रहा है।
इंदौर-बलवाड़ा के बीच वर्तमान में 35 किमी का सफर तय करने में दो से ढाई घंटे का समय लग रहा है। प्रोजेक्ट से जुड़े एक्सपट्र्स के अनुसार सडक़ निर्माण होने के बाद इंदौर से बलवाड़ा पहुंचने में करीब एक घंटे का समय लगेगा। वहीं सडक़ के खतरनाक मोड खत्म होने से दूरी भी करीब ढाई किमी कम होगी।
यह कॉरिडोर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बीच यात्रा को आसान बनाएगा। टनल के निर्माण के बाद सौंदर्यीकरण का कार्य होगा, इसमें सबसे अहम टनल की दीवारों पर रामायण, महाभारत के प्रसंगों के साथ ही ज्योतिलिँग, मालवा-निमाड़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों की चित्रकारी भी की जाएगी।
घाट क्षेत्र में सफर को आसान बनाने के लिए तीन आधुनिक टनल बनाई गई हैं…
Published on:
10 Apr 2026 11:04 am
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