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आबोहवा की रियल टाइम मॉनिटरिंग में छेड़छाड़ कर शहर से कर रहे खिलवाड़, पीएम-2.5 का डाटा हटा कर कम किया एक्यूआइ

सीपीसीबी की रियल टाइम साइट पर प्रदेश के अन्य शहरों में पीएम-2.5 शामिल।  

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आबोहवा की रियल टाइम मॉनिटरिंग में छेड़छाड़ कर शहर से कर रहे खिलवाड़, पीएम-2.5 का डाटा हटा कर कम किया एक्यूआइ

आबोहवा की रियल टाइम मॉनिटरिंग में छेड़छाड़ कर शहर से कर रहे खिलवाड़, पीएम-2.5 का डाटा हटा कर कम किया एक्यूआइ

इंदौर. शहर में स्वच्छता के बाद आबोहवा में प्रदूषण का स्तर कम करने के प्रयासों को प्रशासन, नगर निगम व प्रदूषण विभाग के अफसरों की अनदेखी पलीता लगा रही है। सीपीसीबी द्वारा जारी साइट पर हो रही रियल टाइम मानिटरिंग में छेड़छाड़ कर शहर के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। हवा में सबसे खतरनाक माने जाने वाले पीएम-2.5 के मापन का डाटा साइट से हटा कर एक्यूआइ के सालाना औसत में कमी लाई जा रही है। हकीकत में भी यह मॉनिटरिंग सेंटर के बाहर रीगल तिराहे पर लगे डिस्पले से गायब है। जबकि, प्रदेश के अन्य शहरों के लिए यह डाटा साइट पर दिया जा रहा है। शहर की आबोहवा में प्रदूषण के मापन में किए जा रहे अफसरों के इस घालमेल का परिणाम देखें तो 23 मई के बाद एक्यूआइ का औसत घटकर 70-80 के बीच रह गया है। जबकि, पीएम-2.5 का मापन शामिल होने पर यह औसत 120 से 150 या इससे भी ज्यादा होता है।

विशेषज्ञों का कहना है, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पिछले दिनों आबोहवा में बारीक कणों के मानकों में बदलाव करते हुए पीएम-2.5 को 25 माइक्रो ग्राम कर दिया है। ऐसे में इसकी वर्तमान मात्रा 40-60 माइक्रो ग्राम भी लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करेगी। आबो हवा में सुधार के मिशन को कमजोर करेगी। इसके बिना एक्यूआइ का मापन तो पूरे प्रोजेक्ट को संदेह के घेरे में लाएगा। अफसर इस कारस्थानी के लिए साइट मेंटेनेंस का तर्क दे रहे हैं, यदि ऐसा होता तो प्रदेश के अन्य शहरों भोपाल, ग्वालियर व जबलपुर में इसका मापन दर्ज नहीं हो रहा होता। वहां हर घंटे की निगरानी हो रही है। डाटा इंट्री भी चल रही है। जबकि, इंदौर का डिस्प्ले खाली दिखा रहा है।

मामला मेरे संज्ञान में नहीं है

मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो जल्द इसे चालू करवाएंगे। यह ठीक नहीं है।

- एसएन द्विवेदी, प्रमुख, क्षेत्रीय प्रदूषण विभाग