केमिकल वाले रंगों से दूरी बना रहे इंदौरी, हर्बल रंगों की जबर्दस्त मांग।
इंदौर. रंगों के त्योहार होली और फिर रंगपंचमी के लिए बाजार तैयार है। दुकानों पर रंग, गुलाल, अबीर के साथ रंग-बिरंगी पिचकारी, गुब्बारे और मास्क सजने लगे हैं। इस बार होली रंग-बिरंगी ही नहीं, बल्कि खुशबूदार भी रहेगी। बाजार में कई तरह के ऐसे हर्बल रंग हैं, जो रंगत के साथ अपनी महक से भी त्योहार का मजा बढ़ाएंगे। केमिकल वाले रंगों से दूरी बना रहे इंदौरी, हर्बल रंगों की जबर्दस्त मांग
रानीपुरा, रिवर साइड रोड, पाटनीपुरा, मालवा मिल सहित कई इलाकों में रंग, पिचकारी की थोक व खेरची दुकानें लगती हैं। कोविड के दौरान दो साल तक होली नहीं मनी और पिछली बार स्थिति सामान्य होने पर इंदौरियों ने होली खेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कुछ सालों से केमिकल युक्त रंगों की जगह हर्बल रंगों का इस्तेमाल बढ़ा है। इसे देखते हुए कई कंपनियों ने बाजार में हर्बल रंगों की बड़ी रेंज उतारी है। वन विभाग भी ग्राम वन समितियों के महिला समूह की मदद से हर्बल रंग तैयार करवा रहा है। हर्बल रंगों की मांग बढ़ने की वजह केमिकल युक्त रंगों से होने वाले नुकसान से बचना है।-
20 से बढ़कर 40 फीसदी हुआ बाजार
इस बार बाजार में हर्बल रंग की बिक्री में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। थोक कारोबारियों के अनुसार, पिछले साल तक हर्बल रंग की मांग 20 फीसदी थी, जो बढ़कर 40 फीसदी तक पहुंच गई है। होली से दो दिन पहले तक आसपास के शहरों के लोग रंग, अबीर और गुलाल खरीदने इंदौर आते हैं। हर्बल रंग की मांग बढ़ने से इतनी आपूर्ति सुनिश्चित करना मुश्किल है।
मथुरा-दिल्ली से होती है आपूर्ति
थोक कारोबारी लखन बालचंदानी ने बताया कि इंदौर में मथुरा, दिल्ली और हाथरस से रंगों की आपूर्ति होती है। कुछ साल पहले तक चीन की पिचकारियों का मार्केट में बड़ा हिस्सा था। अब ये चीनी पिचकारियां बाजार से पूरी तरह गायब हो गई हैं। इंदौर में दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद से पिचकारियां आ रही हैं।