7 जुलाई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘जीवन को संवारने से बेहतर कोई सुंदर चित्र नहीं हो सकता’

महिला कथाकारों की कहानियों पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन
2 min read
Google source verification

इंदौर

image

Reena Sharma

Mar 10, 2019

indore

‘जीवन को संवारने से बेहतर कोई सुंदर चित्र नहीं हो सकता’

इंदौर. दो कलाकारों का जीवन के प्रति नजरिया कितना भिन्न हो सकता है, यह ख्यात लेखिका मन्नू भंडारी की चर्चित कहानी दो कलाकार पर आधारित फिल्म में दिखाया गया। सूत्रधार फिल्म सोसायटी द्वारा शनिवार को महिला कथाकारों की कहानियों पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन प्रीतमलाल दुआ सभागृह में किया गया। इसमें ख्यात कथाकार मन्नू भंडारी, कुर्रतल एन हैदर, मालती जोशी, इस्मत चुगताई, चित्रा मुद्गल और सूर्यबाला आदि की कहानियों पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन किया गया।

जीवन का पहला गीत, हार बनी जीवन की जीत: दो कलाकार फिल्म में दो कलाकारों के नजरिए को बेहतर ढंग से दिखाया है। दो दोस्त कॉलेज में एक साथ पढ़ती हैं। पहली दोस्त अपनी चित्रकला के जरिए सारी दुनिया में नाम कमाना चाहती है और दूसरी दोस्त के जीवन का लक्ष्य दूसरे के जीवन में रंग भरना होता है, ताकि जिंदगी के कैनवास पर हर चेहरे पर मुस्कान बरकरार रहे। पहली दोस्त चित्रा को एक पेंटिंग के लिए फ्रांस में अवॉर्ड मिलता है। उस पेंटिंग में एक एक्सीडेंट में अपनी मां को खो देने वाले दो बच्चों के दर्द को दिखाया गया था। सालों बाद जब चित्रा भारत वापस आती है, तो अपनी दोस्त अपर्णा से मिलती है।

अपर्णा ने उन अनाथ बच्चों को अपना लिया था। जब चित्रा को यह सच पता चलता है, तो वह टूट जाती है और उसे अपनी दोस्त की बात याद आती है कि जीवन की असली खुशी दूसरों के जीवन में रंग भरना है। फिल्म के अंत में गीत ‘जीवन का पहला गीत, हार बनी जीत, आकाश का अर्थ नहीं धरती है जीवन का गीत’ दिल को गहराई से छूत जाता है। कहानी ये संदेश देती है जीवन वही सार्थक है, जो दूसरों को समर्पित हो। फिल्म का निर्देशन चित्रकार और लेखन प्रभु जोशी ने किया।

कार्यक्रम में ख्यात कथाकार कुर्रतल एन हैदर की कहानी नजार दरमिया भी प्रदर्शित की गई। ये कहानी प्रेम में विवशता को दिखाती है। फिल्म का निर्देशन राकेश त्यागी ने किया। कहानी की शुरुआत घर की नौकरानी के वॉयलिन बजाने से होती है। जब घर का मालिक उसे वॉयलिन बजाते देखता है, तो उस पर नाराज हो जाता है। जब उसे पता चलता है कि उस नौकरानी को उसकी पूर्व प्रेमिका ने आंखें दान की थी, तो उसका नजरिया बदल जाता है और वह वॉयलिन उसे भेंट कर देता है। प्रेम में विवशता को बेहद प्रभावी ढंग से दिखाया गया है। कहानी का संदेश है कि कैसे वक्त के साथ हमारा किसी चीज के लिए नजरिया बदलता रहता है।