नौ दिन चले अढ़ाई कोस : न कमेटी में संशोधन, न ही बनी कोई कार्ययोजना
उत्तम राठौर । इंदौर।
नौ दिन चले अढ़ाई कोस... कुछ ऐसे हाल नगर निगम शहरी सीमा में आए 29 गांवों के हो रहे हैं। वे विकास कार्यों को तरस रहे हैं। आज से ढाई महीने पहले हुई निगम परिषद की बैठक में इनके विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे, जो फेल हो गए। चार माह पहले यहां के लोगों को मूलभूत सुविधाएं देने के लिए बनाई गई कमेटी में न तो संशोधन हुआ और न ही अभी तक कोई कार्ययोजना बनी है। इससे स्थानीय पार्षद और रहवासी परेशान हैं। इस ओर न तो महापौर ध्यान दे रहे हैं और न ही निगम अफसर कोई रुचि ले रहे हैं।
वर्ष-2014 में शहर से लगे 29 गांवों में बेतरतीब विकास कार्य के चलते इन्हें निगम सीमा में शामिल कर वार्ड में बदल दिया गया। इनके कॉलोनी-मोहल्लों के रहवासियों की समस्या नौ वर्ष गुजरने के बावजूद हल नहीं हुई। 29 गांवों में विकास कार्य करने के लिए निगम बजट में हर वर्ष करोड़ों रुपए का प्रावधान किया जाता है, लेकिन विकास कार्य करने का कोई खाका न तैयार होने से लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है। मेयर-इन-कौंसिंल (एमआइसी) से लेकर निगम परिषद की बैठक तक में इन गांवों की समस्याओं को लेकर बात होती है पर काम नहीं। जब से ये गांव निगम सीमा में आए और वार्ड में बदले, तब से ही लोग पेयजल, सडक़, ड्रेनेज, सीवर और स्ट्रीट लाइट आदि समस्याओं से जूझ रहे हैं। साथ ही निगम में लगातार शिकायतें करते आ रहे हैं।
पार्षदों ने दमदारी से उठाया था मुद्दा
ढाई माह पहले 6 दिसंबर को हुई निगम परिषद की बैठक में इन गांवों के 15 वार्डों में विकास कार्य कर लोगों को मूलभूत सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे किए गए पर अभी तक कोई काम न होने से फेल हो गए। इधर, परिषद बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने चार महीने पहले नवंबर में 29 गांवों के लोगों को मूलभूत सुविधाएं देने के लिए बनाई निगम अफसरों की कमेटी में संशोधन करने की बात कही थी। कमेटी में संशोधन कर निगम अफसरों के साथ पार्षदों और शहर की प्लानिंग से जुड़े प्रबुद्धजन को शामिल करने की बात महापौर ने कही थी। साथ ही विकास के लिए जल्द ही कार्ययोजना बनाने को कहा था। ढाई महीने से न तो कमेटी में संशोधन हुआ और न ही कार्य योजना बनी। इसके चलते 29 गांवों में आने वाले 15 वार्डों के पार्षद और रहवासी परेशान हैं और विकास की बाट जोह रहे हैं। हालांकि पार्षदों ने दमदारी से परिषद की बैठक में 29 गांवों का मुद्दा उठाया था, काम शुरू न होने से सारा दम निकल गया।
बिलावली को शामिल करने की अटकी योजना
निगम ने 29 गांवों में विकास कार्य करने के साथ बिलावली को भी इसमें शामिल करने की योजना बनाई थी। इसकी घोषणा परिषद की बैठक में महापौर ने भी की थी। न तो यह घोषणा पूरी हुई और योजना अलग अटक गई।