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MP में 1800 करोड़ की ‘बायपास सड़क’ का काम शुरू, बनेंगे कई पुल

MP News: ट्रैफिक सुधार का सपना दिखाने वाला पश्चिमी बायपास अब तेजी से आकार ले रहा है, लेकिन निर्माण के साथ जमीन अधिग्रहण, किसानों के विरोध और हाईकोर्ट की सख्ती ने इस मेगा प्रोजेक्ट को विवादों के केंद्र में ला खड़ा किया है।

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इंदौर

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Akash Dewani

Jan 20, 2026

mp news 1800 crore indore western bypass construction land acquisition in high court

1800 crore indore western bypass construction (फोटो- Freepik)

Western Bypass Construction:इंदौर जिले में पश्चिमी बायपास ने आकार लेना शुरू कर दिया है। 80 प्रतिशत जमीन का कब्जा मिलने के बाद एनएचएआइ ने सड़क के साथ पुल-पुलिया बनाना शुरू कर दिया है। 64 किमी के इस हिस्से का पीथमपुर-देपालपुर क्षेत्र में निर्माण हो रहा है। रोलाई, बड़ोदिया पंथ, करडिया, पालदी, मिर्जापुर में काम चल रहा है।

एनएचएआइ (NHAI) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण यादव ने बताया कि ट्रैफिक सुधार के लिए सवा दो साल पहले नए बायपास की योजना बनाई गई थी। मौजूदा बायपास ओवरलोड होने से पूर्वी और पश्चिमी आउटर बायपास का निर्माण प्रस्तावित है। सिंहस्थ के पहले निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। (MP News)

1800 करोड़ में बनेगा बायपास, बनेंगे कई पुल

मालूम हो, पश्चिमी बायपास की स्वीकृति जून 2023 में तो मार्च 2024 में 1880 करोड़ के टेंडर होने के साथ भू-अर्जन की प्रक्रिया (Land Acquisition) शुरू की गई।पश्चिमी बायपास के लिए अहमदाबाद की कंपनी को ठेका दिया गया है। दो चरण में सड़क निर्माण की लागत 996 और 884 करोड़ है।

एनएचएआइ के अनुसार, आठ किमी में पीथमपुर से सड़क शुरू होगी। इसके बाद 12 किमी देपालपुर, 20 किमी हातोद, 14 किमी सांवेर से होते हुए सड़क गुजरेगी। बायपास के लिए 31 गांवों की 600 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। जैतपुरा, मुंडला हुसैन, धतूरिया, ब्राह्मण पीपल्या और एक अन्य गांव की जमीन एनएचएआइ को पहले ही मिल चुकी है।

पूर्वी बायपास के टेंडर नहीं

शहर को कवर करते हुए रिंग शेप में नया बायपास बनेगा। पश्चिम और पूर्व के दो हिस्से में निर्माण की योजना है। दोनों हिस्सों को एनएचएआइ को ही बनाना था, लेकिनबाद में एमपीआरडीसीद्वारा पूर्वी बायपास बनाने की बात सामने आई। इसके बाद एनएचएआइ ने टेंडर निरस्त कर दिया। ये हिस्सा एमपीआरडीसी बनाएगा या एनएचएआइ इस निर्णय में एक साल से ज्यादा लगा। कुछ माह पहले पूर्वी बायपास के निर्माण की गेंद एनएचएआइ के पाले में आ गई है। किसानों के विरोध के चलते सर्वे और टेंडर नहीं हो पा रहे हैं।

हाईकोर्ट में आया रिकॉर्ड, केंद्र के वकील ने मांगा समय

पश्चिम बायपास (रिंग रोड) की योजना से जुड़े दस्तावेज सोमवार को हाईकोर्ट में पेश हुए। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए डिप्टी सॉलिसिटर जनरल रोमेश दवे ने इसे समझने और जवाब देने के लिए समय मांग लिया। इस पर जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने 12 फरवरी को अगली सुनवाई तय की है। पश्चिमी बायपास के लिए जमीन अधिग्रहण में वैध कॉलोनी नैचुरल वैली को भी शामिल करने के खिलाफ कॉलोनाइजर्स और प्लॉटधारकों की ओर से याचिकाएं दायर की गई हैं। पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया था कि इस सड़क को नेशनल हाईवे घोषित नहीं किया गया है।

इसका विधिवत रूप से नोटिफिकेशन भी जारी नहीं किया गया है। न ही इसका कोई नंबर जारी किया गया है। इस प्रक्रिया के बगैर एनएचएआइ एक्ट के तहत जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता है। यदि अधिग्रहण किया भी जाना है तो भूमि अधिग्रहण पुनर्वास और पुनर्स्थापना में उचित मुआवजे के तहत जमीन अधिग्रहित की जा सकती है। ऐसा नहीं हुआ है। इसके बाद कोर्ट ने परियोजना से जुड़े दस्तावेज बुलाने के आदेश दिए थे। (MP News)

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