
Indore Fire Tragedy The Pain of Life(photo: patrika creative)
Indore Fire Tragedy: 'आग लगते ही पूरे घर में गहरा धुआं तेजी से भर गया था। चारों तरफ अंधेरा था, वहां सांस तक लेना मुश्किल था। कुछ भी नजर नहीं आ रहा था सबकुछ धुंआ, धुंआ…। हादसे में बचे कारोबारी मनोज पुगल्या के बेटे सौमिल और बड़े बेटे सौरभ को जब भी वो मंजर खौफनाक मंजर याद आता है, वे सहम जाते हैं, सुबक-सुबक कर रो पड़ते हैं। उनके आंसू रोके नहीं रुक रुकते। वे जैसे चीखना चाहते हैं, चिल्लाना चाहते हैं…। वह भूल नहीं पा रहे कि जब वो घर में दोबारा पहुंचे तो घर की बड़ी बहू का शव बैठी अवस्था में था, जैसे वो अब भी इंतजार कर रही थी कि कोई आएगा और उन्हें बचा लेगा....
दिल दहला देने वाला इंदौर अग्निकांड का ये मंजर आपकी भी आंखें नम कर देगा। आप भी जानें बुधवार तड़के जब आग ने मचाया तांडव तब क्या क्या गुजरा… सौनिल और सौरभ ने सुनाई पूरी कहानी….
तिलक नगर स्थित ग्रेटर बृजेश्वरी कॉलोनी में हुए EV हादसे ने हंसते-खेलते परिवार को एक पल में मिटाकर रख दिया, जो बचे उनकी खुशियों को बिखेर कर दिया। प्लायवुड और लकड़ी से बने इंटीरियर ने आग की लपटों को ऐसे खींचा कि चंद मिनटों में सबकुछ मिट गया। हादसे में 8 लोगों की जान गई, बड़ी बहू का शव बैठी हुई अवस्था में मिलने की खबर ने दिल को झकझोर कर रख दिया। सौमिल ने बताया कि घर में सिवाय अंधेरे और धुएं के और कुछ नहीं दिख रहा था। ऐसी स्थिति में भी बड़े भाई सौरभ ने खुद को संभाला और आवाज देकर सबको जगाया। किसी तरह मां सुनीता और छोटा भाई हर्षित और सौमिल बालकनी तक पहुंचे। पड़ोसियों को मदद के लिए पुकारा।
पड़ोसियों ने जालियां काटीं, तोड़ीं और सीढ़ी लगाई जिससे वे चारों किसी तरह बाहर निकल पाए। बाद में उन्होंने घर में फंसे अन्य लोगों को भी बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन आग की लपटें और घने धुएं ने उन्हें वापस अंदर जाने ही नहीं दिया। चंद मिनटों में सबकुछ बदल गया और फिर जो बचा वो सिर्फ दर्द था, सिहरन थी उन बुरी यादों की जो ता जिंदगी सिर्फ तकलीफ देती रहेंगी।
सौरभ फफक कर रो पड़ता है, उस खौफनाक मंजर को याद कर बताता है कि कैसे उसने अपने दोनों भाइयों और मां को बाहर निकाला। अंदर बाकी लोग फंसे थे, हालात इतने खराब थे कि अंदर फंसे लोग आवाज तक नहीं लगा पाए। पत्नी सिमरन, मामा, उनके बच्चे और पिता भी… सब के सब अंदर फंसे थे। न कोई भाग सका और न ही कोई मदद के लिए पुकार सका। जो जहां था वहीं ठहर गया। उसने बताया कि सिमरन बैठी हुई अवस्था में थी, जैसे आखिरी सांस तक इंतजार कर रही हों कि कोई उन्हें बचा लेगा। काश कि वो उन्हें बचा पाता, अगर दो मिनट…. सिर्फ दो मिनट और मिलते तो वो सबको बचा सकता था। लेकिन उसकी बेबसी कि वो किसी को बचा नहीं सका। एक बेटे और पति के सामने उसका पूरा परिवार आग की भेंट चढ़ गया।
बता दें कि हादसे की सूचना पर पुलिस, एफएसएल टीम और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची थीं। रेस्क्यू के दौरान तीन शव दूसरी मंजिल की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर मिले। इससे समझा जा सकता है कि कैसे ये लोग अपनी जान बचाने छत की तरफ भागे होंगे। लेकिन रास्ते में लगा चैनल गेट बंद था और वे सीढ़ियों पर ही मौत की नींद सो गए। धुएं की आगोश में सभी की सांसें थम गईं और धड़कनें रुक गईं। आखिरी पल तक बचने की कोशिश लॉक्ड दरवाजों के पीछे मर गई।
बताया जा रहा है कि हादसे में मनोज पुगल्या और उनकी बहू सिमरन के साथ मनोज के साले विजय सेठिया और उनके परिवार के लोगों की भी जान चली गई। घर में हाल ही में शादी के बाद खुशियों का माहौल था। 23 जनवरी 2026 को ही मनोज के बेटे सौमिल की शादी हुई थी। शादी के बाद घर में रस्म-ओ-रिवाज के कार्यक्रम चल रहे थे। रिश्तेदारों का आना-जाना था।
इन खुशियों के बीच विजय सेठिया भी अपने परिवार के साथ इंदौर आए थे। जबड़े का कैंसर के इलाज के लिए वे यहां ठहरे हुए थे। शादी के बाद से ही उनका परिवार मनोज के घर पर ही रह रहा था। लेकिन किसे पता था कि खुशियों से भरा घर अचानक 8 मौतों की कब्रगाह बन जाएगा, खुशियों का घर-आंगन खंडहर में तब्दील हो जाएगा और दे जाएगा सिर्फ सिसकियां….
Updated on:
19 Mar 2026, 5:53 PM IST
Published on:
19 Mar 2026, 5:53 PM IST
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