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इंदौर अग्निकांड- अंतिम सांस तक इंतजार….बैठी अवस्था में मिला बड़ी बहू का शव, आंखों देखा हाल… तड़प उठेगा दिल

Indore Fire Tragedy: हादसे में बचे कारोबारी मनोज पुगल्या के बेटे सौमिल और बड़े बेटे सौरभ को जब भी वो मंजर खौफनाक मंजर याद आता है, वे सहम जाते हैं, सुबक-सुबक कर रो पड़ते हैं। जैसे चीखना चाहते हों... दर्द में चिल्लाना चाहते हों... ये क्या हुआ....
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इंदौर

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Sanjana Kumar

•

Updated: 19 Mar 2026, 5:53 PM IST

Indore Fire Tragedy The Pain of Life

Indore Fire Tragedy The Pain of Life(photo: patrika creative)

Indore Fire Tragedy: 'आग लगते ही पूरे घर में गहरा धुआं तेजी से भर गया था। चारों तरफ अंधेरा था, वहां सांस तक लेना मुश्किल था। कुछ भी नजर नहीं आ रहा था सबकुछ धुंआ, धुंआ…। हादसे में बचे कारोबारी मनोज पुगल्या के बेटे सौमिल और बड़े बेटे सौरभ को जब भी वो मंजर खौफनाक मंजर याद आता है, वे सहम जाते हैं, सुबक-सुबक कर रो पड़ते हैं। उनके आंसू रोके नहीं रुक रुकते। वे जैसे चीखना चाहते हैं, चिल्लाना चाहते हैं…। वह भूल नहीं पा रहे कि जब वो घर में दोबारा पहुंचे तो घर की बड़ी बहू का शव बैठी अवस्था में था, जैसे वो अब भी इंतजार कर रही थी कि कोई आएगा और उन्हें बचा लेगा....

दिल दहला देने वाला इंदौर अग्निकांड का ये मंजर आपकी भी आंखें नम कर देगा। आप भी जानें बुधवार तड़के जब आग ने मचाया तांडव तब क्या क्या गुजरा… सौनिल और सौरभ ने सुनाई पूरी कहानी….

तिलक नगर स्थित ग्रेटर बृजेश्वरी कॉलोनी में हुए EV हादसे ने हंसते-खेलते परिवार को एक पल में मिटाकर रख दिया, जो बचे उनकी खुशियों को बिखेर कर दिया। प्लायवुड और लकड़ी से बने इंटीरियर ने आग की लपटों को ऐसे खींचा कि चंद मिनटों में सबकुछ मिट गया। हादसे में 8 लोगों की जान गई, बड़ी बहू का शव बैठी हुई अवस्था में मिलने की खबर ने दिल को झकझोर कर रख दिया। सौमिल ने बताया कि घर में सिवाय अंधेरे और धुएं के और कुछ नहीं दिख रहा था। ऐसी स्थिति में भी बड़े भाई सौरभ ने खुद को संभाला और आवाज देकर सबको जगाया। किसी तरह मां सुनीता और छोटा भाई हर्षित और सौमिल बालकनी तक पहुंचे। पड़ोसियों को मदद के लिए पुकारा।

पड़ोसियों ने काटी जालियां

पड़ोसियों ने जालियां काटीं, तोड़ीं और सीढ़ी लगाई जिससे वे चारों किसी तरह बाहर निकल पाए। बाद में उन्होंने घर में फंसे अन्य लोगों को भी बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन आग की लपटें और घने धुएं ने उन्हें वापस अंदर जाने ही नहीं दिया। चंद मिनटों में सबकुछ बदल गया और फिर जो बचा वो सिर्फ दर्द था, सिहरन थी उन बुरी यादों की जो ता जिंदगी सिर्फ तकलीफ देती रहेंगी।

फफक कर रो पड़ा सौरभ, सिमरन को देख तड़प कर रह गया दिल

सौरभ फफक कर रो पड़ता है, उस खौफनाक मंजर को याद कर बताता है कि कैसे उसने अपने दोनों भाइयों और मां को बाहर निकाला। अंदर बाकी लोग फंसे थे, हालात इतने खराब थे कि अंदर फंसे लोग आवाज तक नहीं लगा पाए। पत्नी सिमरन, मामा, उनके बच्चे और पिता भी… सब के सब अंदर फंसे थे। न कोई भाग सका और न ही कोई मदद के लिए पुकार सका। जो जहां था वहीं ठहर गया। उसने बताया कि सिमरन बैठी हुई अवस्था में थी, जैसे आखिरी सांस तक इंतजार कर रही हों कि कोई उन्हें बचा लेगा। काश कि वो उन्हें बचा पाता, अगर दो मिनट…. सिर्फ दो मिनट और मिलते तो वो सबको बचा सकता था। लेकिन उसकी बेबसी कि वो किसी को बचा नहीं सका। एक बेटे और पति के सामने उसका पूरा परिवार आग की भेंट चढ़ गया।

रेस्क्यू के दौरान सीढ़ियों पर मिले तीन शव

बता दें कि हादसे की सूचना पर पुलिस, एफएसएल टीम और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची थीं। रेस्क्यू के दौरान तीन शव दूसरी मंजिल की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर मिले। इससे समझा जा सकता है कि कैसे ये लोग अपनी जान बचाने छत की तरफ भागे होंगे। लेकिन रास्ते में लगा चैनल गेट बंद था और वे सीढ़ियों पर ही मौत की नींद सो गए। धुएं की आगोश में सभी की सांसें थम गईं और धड़कनें रुक गईं। आखिरी पल तक बचने की कोशिश लॉक्ड दरवाजों के पीछे मर गई।

5 प्वॉइंट्स में समझें इंदौर अग्निकांड

1- तड़के 5.30 बजे शुरू हुआ अग्नि तांडव
बुधवार सुबह करीब 5.30 बजे EV चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट हुआ, (लेकिन अब परिवार का दावा बिजली के पोल से भड़की आग)

2- कार से बाइक फिर घर तक फैली आग
शुरुआत में आग कार में लगी, फिर अंदर खड़ी बाइक में और फिर ग्राउंड फ्लोर से होते हुए पूरे घर में फैल गई।

3- ज्वलनशील सामान ने आग को किया बेकाबू
घर में रखे ज्वलशील केमिकल और 10 से ज्यादा गैस सिलेंडरों ने आग को बेकाबू कर दिया। आग की लपटों से घिरे घर में रखे गैस सिलेंडर फटना शुरू हो गए। सिलेंडर ब्लास्ट के तेज धमाकों से पूरा इलाका दहल गया।

4- मकान का हिस्सा ढहा
आग की चपेट में आने के बाद तीन मंजिला मकान का एक हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा। घर में डिजिटल लॉक सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। जिससे घर के सभी दरवाजे लॉक हो गए, घर के लोग अंदर ही फंसे रह गए। 8 लोग बाहर नहीं आ सके, लेकिन चार लोगों की जिंदगी जैसे-तैसे बच गई।

5- राहगीर ने दी सूचना, देर से पहुंची फायर ब्रिगेड
मॉर्निंग वॉक पर निकले एक शख्स ने आग देखी और शोर मचाया, तब लोग इकट्ठे हुए, स्थानीय लोगों ने फायरब्रिगेड को सूचना दी लेकिन वह डेढ़ घंटे देर से पहुंची और तब रेस्क्यू शुरू हो सका। लॉक लगे दरवाजे तोड़कर टीम घर में पहुंची, लेकिन तब तक 8 लोग मौत की नींद सो चुके थे। सभी के शव बाहर निकाले गए। 4 लोग घायल हो चुके थे जिन्हें बचा लिया गया।

शादी के बाद चल रहे थे रस्म-ओ-रिवाज के कार्यक्रम, अब रह गईं सिसकियां

बताया जा रहा है कि हादसे में मनोज पुगल्या और उनकी बहू सिमरन के साथ मनोज के साले विजय सेठिया और उनके परिवार के लोगों की भी जान चली गई। घर में हाल ही में शादी के बाद खुशियों का माहौल था। 23 जनवरी 2026 को ही मनोज के बेटे सौमिल की शादी हुई थी। शादी के बाद घर में रस्म-ओ-रिवाज के कार्यक्रम चल रहे थे। रिश्तेदारों का आना-जाना था।

इन खुशियों के बीच विजय सेठिया भी अपने परिवार के साथ इंदौर आए थे। जबड़े का कैंसर के इलाज के लिए वे यहां ठहरे हुए थे। शादी के बाद से ही उनका परिवार मनोज के घर पर ही रह रहा था। लेकिन किसे पता था कि खुशियों से भरा घर अचानक 8 मौतों की कब्रगाह बन जाएगा, खुशियों का घर-आंगन खंडहर में तब्दील हो जाएगा और दे जाएगा सिर्फ सिसकियां….