
पपेट शो दिखाकर, जू ले जाकर बच्चों में कुछ इस तरह पैदा कर रहे साइंस के प्रति रुचि
इंदौर. पूरी दुनिया साइंस पर ही टिकी हुई है। फोन पर बात करने से लेकर घर में इस्तेमाल होने वाली मशीनें, सडक़ों पर चलने वाले वाहन और फैक्ट्रियों में आसानी से बनकर तैयार हो जाने वाली चीजों का बन जाना। ये सबकुछ साइंस से ही संभव हो पाया है। साइंस दिन-ब-दिन तरक्की भी कर रहा है, इसमें कई इनोवेशन होने लगे हैं जो आजकल स्कूलों में खासतौर पर नजर आ रहे हैं।
नेशनल साइंस डे पर शहर के स्कूलों में बात की गई तो पता चला कि बच्चों में साइंस की रुचि तेजी से बढने लगी हैं जिसकी वजह स्कूलों में नए-नए प्रयोग करना है। टीचर्स का कहना है साइंस पढऩे से सोच में परिवर्तन आता है। पैरेंट्स अक्सर बच्चों से कहते हैं कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं करना है, लेकिन उन्हें यह नहीं बताते कि कोई काम क्यों नहीं करना है। हर चीज के पीछे लॉजिक है, जो बच्चों को पता होना चाहिए। यही सब बातें बच्चों को स्कूलों में लॉजिक तरीके से सीखाई जाती हैं।
स्कूल में कराते है पपेट शो
हम बच्चों को गेम्स के जरिए साइंस पढ़ाते है। छोटे बच्चों को पपेट शो दिखाते हैं। डिफरेंट तरीके के प्लांट्स दिखाते हैं। एनिमल्स दिखाने के लिए जू ले जाते हैं और साइंस के एग्जीबिशन में पार्टीसिपेंट कराते हैं, ताकि बच्चे साइंस को समझे ही नहीं बल्कि साइंस क्या है यह समझें भी। ऑनलाइन स्टडी के चलते भी बच्चों को वीडियोज दिखाए गए और घर पर भी साइंस की एक्टिविटी कराई गई, ताकि वे साइंस से जुड़े रहें।
-उमेश सिंह राठौर, साइंस टीचर, चोईथराम स्कूल नॉर्थ स्कूल
स्कूल में बनाई अटल टिंकरिंग लेब
बच्चों की साइंस में रुचि बढ़ाने के लिए स्कूल में अटल टिंकरिंग लेब सबसे ज्यादा सार्थक सिध्द हो रही है। बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए केवल ट्रेडिशनल तरीके से पढ़ाना ही काफी नहीं है बल्कि उनके दिमाग में आइडियाज जनरेट हो कुछ ऐसा किया जाना चाहिए। ऐसे में टिंकरिंग लैब बच्चों के लिए काफी सार्थक सिध्द हो रही है। इसमें तीसरी कक्षा से लेकर १२वीं तक के बच्चे रिसर्च करते हैं। इन दिनों सबसे ज्यादा ड्रोन, थ्रीडी प्रिंटर और रोबोटिक्स पर काम किया जा रहा है।
-डॉ. प्रकाश चौधरी, प्रिंसिपल, प्रेस्टीज पब्लिक स्कूल
वेस्ट से बेस्ट बनाने का देते हैं टास्क
केवल स्कूल में ही नहीं बल्कि घर पर भी बच्चे साइंस से जुड़े रहे इसके लिए हम उनसे बायो प्लास्टिक के मॉडल बनाने के लिए कहते है और यह बच्चों ने बड़ी ही उत्सुकता से बनाएं भी है। रेपर्स से बच्चों ने ब्रिक्स भी बनाएं, इससे वे वेस्ट से बेस्ट बनाना भी सीखें और साइंस भी। इसके अलावा साइंस की क्विज और डिस्कशन भी कराते रहते हैं। साथ ही ९वीं से १२वीं के बच्चों को डेमोस्ट्रेशन भी कराते हैं।
-जगमीत छाबड़ा, साइंस टीचर, चोईथराम स्कूल
Published on:
28 Feb 2022 09:00 pm
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