
UPSC Success Story यूपीएससी में इंदौर से 7 का चयन
UPSC Success Story यूपीएससी में इंदौर जिला से सात अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। अनन्या शर्मा की 13वीं रैंक बनी है, वहीं दीक्षा चौरसिया ने 44वीं व समीक्षा द्विवेदी ने 56वीं रैंक हासिल की है। पूर्णत: दृष्टिबाधित अक्षत बलद्वा ने 173वां तो ऋषुल नीमा ने 267वां स्थान पाया है। इंदौर की महू तहसील के तेलीखेड़ा निवासी तरुण पवार ने दूसरे प्रयास में 311वीं रैंक हासिल की है, वहीं महू के भोई मोहल्ला से जुड़े लवेश वर्मा ने 909वीं रैंक पाई है।
संजना पार्क निवासी अनन्या शर्मा की यूपीएससी(UPSC Success Story) में 13वीं रैंक बनी है। उन्होंने यह सफलता तीसरे प्रयास में प्राप्त की। स्कूली शिक्षा डेली कॉलेज से पाई, जबकि चार वर्ष की पढ़ाई पंजाब के नाभा स्थित पंजाब पब्लिक स्कूल में हुई। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से बीए इकोनॉमिक्स ऑनर्स में स्नातक किया। अनन्या रोज 10 से 13 घंटे पढ़ाई करती थीं। पढऩे की आदत और विभिन्न विषयों पर चर्चा करने की रुचि ने भी उनकी तैयारी को मजबूत बनाया। पहले संयुक्त रक्षा सेवा (सीडीएस) परीक्षा भी दी थी, जिसमें ऑल इंडिया पांचवीं रैंक हासिल की थी। पिता पंजाब के नाभा में एक स्कूल के प्रिंसिपल हैं, जबकि मां इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में प्रोफेसर हैं।
अक्षत बलद्वा की शुरुआती पढ़ाई हिंदी माध्यम से सरकारी स्कूल में हुई। 12वीं तक उन्होंने हिंदी माध्यम से पढ़ाई की। शुरू से ही सिविल सेवा में जाने का सपना था। स्कूल के बाद अक्षत ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) दिया और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में एलएलबी की पढ़ाई की। हिंदी माध्यम से पढ़कर अचानक अंग्रेजी माहौल में पढऩा आसान नहीं था। कॉलेज के शुरुआती सालों में उन्हें संघर्ष करना पड़ा और अंक भी उम्मीद मुताबिक नहीं आए। उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे खुद को माहौल अनुसार ढाल लिया। यूपीएससी की तैयारी कॉलेज के पांचवें वर्ष में शुरू की। उस समय एक तरफ प्रतिष्ठित लॉ कॉलेज का कठिन अकादमिक दबाव था और दूसरी तरफ सिविल सेवा की तैयारी। वर्ष 2025 में ग्रेजुएशन पूरा किया और उसी साल यूपीएससी के लिए पहला प्रयास किया। इसी प्रयास में 173वीं रैंक हासिल कर ली।
अक्षत ने बताया, परिणाम आने से तीन दिन पहले तक वे निराश थे और लगने लगा था कि मानसिक रूप से यह यात्रा बहुत कठिन है। ऐसे समय में उन्होंने खुद को संभाला। मुश्किल समय में किसी और से ज्यादा खुद से ही बातें की और खुद को समझाया कि जिंदगी में हर किसी की अपनी-अपनी चुनौतियां हैं। तैयारी के दौरान आत्मविश्वास और आत्मप्रेरणा सबसे ज्यादा जरूरी है। कोई भी व्यक्ति बाहर से आपको कितनी भी सलाह दें, लेकिन असली ताकत तब आती है जब आप खुद अपने भीतर से खड़े होते हैं। परिवार का भी उन्हें पूरा सहयोग मिला। मां उनके साथ रहती थीं और लगातार उनका हौसला बढ़ाती रहीं।
दीक्षा चौरसिया ने यूपीएससी में 44वीं रैंक हासिल कर अपनी मां का सपना भी पूरा किया। उनकी मां डॉक्टर हैं और वे भी युवावस्था में सिविल सेवा में जाना चाहती थीं। यही सपना आगे चलकर दीक्षा की प्रेरणा बन गया। 12वीं तक की पढ़ाई इंदौर से करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज से इतिहास ऑनर्स में यूजी किया। फिलहाल वह पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में पीजी भी कर रही हैं। दीक्षा ने अपनी यूपीएससी यात्रा साल 2022 में शुरू की थी। पहले प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर सकीं। दूसरे प्रयास में मुख्य परीक्षा में महज 12 अंकों से रह गईं। तीसरे प्रयास में फिर प्रीलिम्स नहीं निकल पाया। कई उतार-चढ़ाव के बाद चौथे प्रयास में उन्होंने 44वीं रैंक हासिल कर ली।
समीक्षा द्विवेदी ने यूपीएससी(UPSC Success Story) में 56वीं रैंक हासिल की है। निजी स्कूल से 12वीं करने के बाद समीक्षा ने कम्प्यूटर साइंस से बीटेक किया और सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनीं। इसके बाद तीन साल सॉफ्टवेयर कंपनी में काम किया। फिर एमबीए कर कॉर्पोरेट सेक्टर में भी सेवाएं दी। इसी बीच समाज के लिए कुछ करने की इच्छा हुई तो उन्होंने सिस्टम के बीच रहकर समाज की तस्वीर बदलने की ठान ली और 2020 में यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। लगातार मेहनत और लगन के चलते पांचवीं बार में समीक्षा ने रैंक हासिल की।
Published on:
07 Mar 2026 10:37 am
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