विधानसभा चुनाव को लेकर बिसात जमा रहे नेता
इंदौर। महज हजार वोट से चुनाव हारने वाले कांग्रेस नेता सत्यनारायण पटेल विधानसभा पांच में सक्रिय हो गए हैं। इस बार उनकी राह आसान नजर नहीं आ रही, क्योंकि शिक्षा जगत से जुड़े स्वप्निल कोठारी भी मैदान में हैं। पर्दे के पीछे उन्हें पटेल विरोधी मदद कर रहे हैं।
वैसे विधानसभा चुनाव को सालभर बाकी हैं लेकिन राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। भाजपा तो ठीक कांग्रेस में भी बवाल कम नहीं है। दावेदारों ने हाथ-पैर फेंकना शुरू कर दिए हैं तो क्षेत्र में बिसात जमाना शुरू कर दी है। कांग्रेस में सबसे रोचक राजनीति इन दिनों पांच नंबर विधानसभा में चल रही है। हजार वोट से चुनाव हारने वाले पूर्व विधायक व राष्ट्रीय सचिव सत्तू पटेल कुछ महीनों से खूब सक्रिय नजर आ रहे हैं। उन्होंने वार्डों में दौरे करने के साथ कार्यकर्ताओं के सुख-दु:ख में आना-जाना बढ़ा दिया है।
इसके अलावा संगठनात्मक आयोजन के माध्यम से खुद और कार्यकर्ताओं को भी जागृत रखने का प्रयास कर रहे हैं। इतना सबकुछ होने के बावजूद उनकी राह आसान नहीं है। अभी से चुनौती मिलना शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के खास माने जाने वाले स्वप्निल कोठारी भी पांच नंबर विधानसभा में खासे सक्रिय हैं। क्षेत्र के सभी प्रमुख नेताओं व कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क में हैं तो कहीं भी आने-जाने में पीछे नहीं हटते हैं।
उस पर नाथ भी उनका कद बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। पिछले दिनों विधायक संजय शुक्ला के घर शोक व्यक्त करने इंदौर आए तब नाथ की निगाह लाइन में लगे कोठारी पर पड़ी तो उन्होंने गाड़ी रुकवाकर अपने पीए को पीछे की गाड़ी में भेज दिया और कोठारी को साथ ले गए। इस नजारे ने इंदौर के कई कांग्रेसियों के दिमाग के तार झनझना दिए, वहीं पटेल को भी सकते में ला दिया। इधर, कई नेता कोठारी की खुलकर मदद भी कर रहे हैं, जिनकी पटेल से पटरी नहीं बैठती।
मदद में दोनों नहीं रहते पीछे
नवरात्र को लेकर अभी से बाजार में माहौल बनना शुरू हो गया है। आयोजक नेताओं के यहां दस्तक दे रहे हैं। मजेदार बात ये है कि पांच नंबर विधानसभा में होने वाले आयोजनों को लेकर पटेल और कोठारी आयोजकों के लिए मददगार साबित हो रहे हैं। यहां तक कि कोठारी तो पूर्व क्षेत्र के सबसे बड़े तिलक नगर रावण दहन कार्यक्रम के अध्यक्ष भी हो गए हैं।
दिल्ली के भरोसे पटेल
वर्ष 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद कांग्रेस सरकार गिर गई। उसके अलावा कांग्रेस नेताओं के पार्टी बदलने की झड़ी सी लग गई। उस दौरान पूर्व विधायक पटेल पर भी भारी दबाव था लेकिन उन्होने पार्टी नहीं छोड़ी। उसके बाद वे सीधे प्रियंका गांधी से जुड़ गए, जिसकी वजह से उन्हें यूपी चुनाव में प्रभारी भी बनाया गया। कड़ी मेहनत करने के बावजूद फल नहीं मिला लेकिन गांधी उन्हें आज भी खासा तवज्जो देती हैं। इस वजह से पटेल अब दिल्ली के भरोसे हैं।