
सिगरेट और तंबाकू छुड़वाने वालों को कुछ इस तरह समझाती हैं दिशा, मासूमियत देखकर तुरंत सिगरेट फेंक देते हैं लोग,सिगरेट और तंबाकू छुड़वाने वालों को कुछ इस तरह समझाती हैं दिशा, मासूमियत देखकर तुरंत सिगरेट फेंक देते हैं लोग
इंदौर.साल 2016 की बात है जब एक पांच साल की बच्ची ने अपने दादाजी तो तंबाकू खाने की वजह से खो दिया। दादाजी से बेहद प्रेम रखने वाली इस बच्ची ने तब से ही इस मासूम सी उम्र से ही स्मोकिंग और टबेको अभियान शुरू कर दिया और यह बच्ची 17 साल की हो चुकी है। इसका नाम है दिशा।
दिशा का नाम की तरह ही काम भी है। छोटी सी उम्र से ही दिशा ने लोगों को दिशा दिखाने का काम शुरू कर दिया था। लोगों को घर-घर जाकर धूम्रपान से होने वाले दुष्प्रभाव बताना, उन्हें अपने मासूम अंदाज में सिगरेट, तंबाकू व अन्य तरीके से भी नशा न करने जागरूक करना ही दिशा के जीवन का उद्देश्य बन चुका है। इस नेक काम में दिशा के पिता अश्विनी और मां संगीता तिवारी के साथ-साथ पूरा परिवार और दोस्त भी पूरी मदद करते हैं।
मासूमियत देखकर लोगों ने फेंक दी सिगरेट
दिशा की मम्मी संगीता ने बताया कि दिशा अपने दादाजी के बहुत करीब थी इसलिए जब वो बीमार हुए तब डॉक्टर के मुहं से कई बार उन्हें तंबाकू और सिगरेट छोडऩे की बात सुना करती थी, लेकिन उन्होंने नहीं छोड़ी। एक दिन उनकी मृत्यु हो गई। उसके बाद दिशा ने धूम्रपान, तंबाकू और अन्य तरह के नशे से होने वाली बीमारियों के बारे में समझा।
लोगों को दिलाई शपथ
दिशा ने शुरुआत में अपने कुछ दोस्तों को इकट्ठा करके तंबाकू खाते या स्मोकिंग करते लोगों को समझाने लगी। हमें लगा कहीं कभी कोई उसे डांट न दें लेकिन लोगों ने उसकी मासूमियत देखकर कई बार हाथों से सिगरेट फेंक दी। तब हमें लगा कि दिशा लोगों को सही दिशा दिखा सकती हैं और हमने उसका साथ देना शुरू किया। फिर वो घर-घर जाकर लोगों को समझाने लगी। फिर खुदके मन से ही उसने लोगों को शपथ भी दिलाई और फिर देखते ही देखते उसका यह अभियान परवान चढ़ गया। फिर दिशा के कुछ दोस्तों ने भी उसका साथ दिया। अब हस्ताक्षर अभियान भी चलाती है। दिशा की उम्र अब१७ साल की हो चुकी हैं।
लिखती है लोगों के रियल स्टोरीज
दिशा बहुत छोटी उम्र से ही तंबाकु और सिगरेट पीने वाले लोगों की रिटल स्टोरीज लिखती हैं और उनका कहानी लोगों को बताती है। दिशा ने पत्रिका से बातचीत में बताया जब कभी मैं किसी को सिगरेट, तंबाकू या नशा करते देखते ही या मुझे इस बारे में पढऩे व सुनने को मिलता हैं तो मुझे मेरे दादाजी की याद आ जाती है और इसलिए मैंने साल २०१४ से ही ऐसे लोगों की रियल स्टोरी लिखना शुरू कर दी। मेरी किताब में सबसे पहली स्टोरी मेरे दादाजी की है। इसे सालभर तक लिखने के बाद इस किताब का इनोग्रेशन साल २०१५ में कराया था। दिशा ने कहा मेरा यह मिशन लाइफ टाइम चलेगा।
दिशा को मिले कई सम्मान
-वुमंस अचीवर अवार्ड से भी दिशा को सम्मानित किया गया।
-2015 में अभिनेता सनी देओल ने दिल्ली में सम्मानित किया।
-2016 में तेजस्विनी अवार्ड से सम्मानित किया गया।
-2017 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नारायणी नम: अवार्ड से सम्मानित किया।
-2017 में विद्यापीठ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्युशन भोपाल में सम्मानित किया गया।
-2019 में स्कूल की तरह से दिशा को सम्मानित किया गया है।
Published on:
01 Mar 2022 09:42 pm
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