इंदौर

वकीलों को लेकर जस्टिस जेके माहेश्वरी ने कही बड़ी बात, पढ़ें क्या कहा…

श्री अरबिंदो यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज के शुभारंभ पर बोले जस्टिस माहेश्वरी।

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Oct 09, 2022
वकीलों को लेकर जस्टिस जेके माहेश्वरी ने कही बड़ी बात, पढ़ें क्या कहा...

इंदौर. सुप्रीम कोर्ट जस्टिस जेके माहेश्वरी ने कहा, अच्छे वकील बनने के लिए रीडिंग, राइटिंग, डिस्कशन और थिंकिंग को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा, कोविड काल हर क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया। इस दौर ने सभी को टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सीखा दिया। अधिवक्ताओं को घर बैठकर ही सुना गया। आज संविधान पीठ का भी लाइव प्रसारण होने लगा है। यह बात जस्टिस माहेश्वरी ने श्री अरबिंदो यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज के शुभारंभ अवसर पर कही। कार्यक्रम में जस्टिस दीपक वर्मा, जस्टिस वीएस कोकजे, इंडियन लॉ इंस्टिट्यूट दिल्ली के प्रो. डॉ. मनोज कुमार सिन्हा, चांसलर डॉ. मंजूश्री भंडारी, प्रो चांसलर डॉ. मोहित भंडारी, डॉ. महक भंडारी व कुलपति डॉ. ज्योति बिंदल मौजूद थीं।

... तो आज मैं डॉक्टर होता

जस्टिस माहेश्वरी ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा, पहले इंजीनियरिंग और मेडिकल क्षेत्र का ही दबदबा था। मैंने भी डॉक्टर बनने के लिए साइंस की पढ़ाई की, अगर जूलॉजी विषय में फेल नहीं हुआ होता तो आज मैं भी डॉक्टर होता। यह फील्ड छोड़कर बीए और फिर लॉ की पढ़ाई की। उन्होंने कहा, मेरी नजर में इस दौर में बहुत अच्छे वकील हैं, लेकिन, उनमें और क्षमता विकसित करने की जरूरत है। ज्यादातर अच्छे वकील प्रैक्टिस नहीं करना चाह रहे।

10 से 20 फीसदी ही चुनते हैं वकालत

जस्टिस दीपक वर्मा ने कहा, अदालतों में बढ़ते प्रकरणों में कमी लाने के लिए सरकार 2022 में 89 सीपीसी का प्रावधान लाई, लेकिन 20 साल बाद भी इससे उतनी सफलता नहीं मिल सकी है। विदेशों की तुलना में हमारे यहां मध्यस्थता के प्रकरण सुलझने में अधिक समय लग रहा है। मैंने महसूस किया कि 80 फीसदी वकील बड़ी लॉ फर्म या मल्टीनेशनल कंपनी जॉइन कर लेते हैं, बाकी के 20 फीसदी ही हैं जो वकालत में आते हैं। मेरा मानना है, वकील की सही पहचान न्यायालय से ही होती है, न कि एसी ऑफिस में बैठकर काम करने से।

पक्षकारों के पास वकीलों से ज्यादा ज्ञान

जस्टिस वीएस कोकजे ने कहा, कानूनी शिक्षा का स्तर सुधारने के प्रयास 30 साल से चल रहे हैं। 50 साल पहले तक इक्का-दुक्का कॉलेज ही लॉ की रेगुलर बढ़ाई कराते थे। ज्यादातर कॉलेजों में शाम की कक्षाएं लगती थीं, जहां पीजी करने वाले शाम को जाकर पढ़ते थे। यहां पढ़ाने वाले भी वकील ही रहते थे, लेकिन आज लॉ कॉलेजों में दाखिले के लिए वैसी मशक्कत होती है, जैसी उस समय मेडिकल और इंजीनियरिंग के लिए होती थी। आज स्पेशलाइजेशन का दौर है, क्योंकि कई पक्षकार वकील से भी ज्यादा जानकार होते हैं।

Published on:
09 Oct 2022 01:28 am
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