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स्वच्छता रैंकिंग मे इंदौर अब गोल्डन सिटी केटेगरी मे देगा टक्कर

फ़ाइल फोटो - डोर टू डोर कचरा संग्रहण वाहन

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इंदौर- स्वच्छता में हर बार अव्वल रहने वाले शहर के लिए अब नई प्रतिस्पर्धा हो सकती है।इसके लिए गोल्डन सिटी क्लब के रूप में नइ श्रेणी बनाने की घोषणा शुक्रवार को आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने दी। गोल्डन सिटी क्लब में वह शहर शामिल किए जाएंगे जो लगातार स्वच्छता के शिखर पर रहते है। और वह अन्य शहरों को आगे नहीं आने देते है।यदि गोल्डन सिटी क्लब में शामिल शहर यदि सर्वेक्षण में पिछड़ जाता है तो उसे फिर से सामान्य सर्वेक्षण में ही भाग लेना होगा।इस घोषणा से इंदौर और सूरत के गोल्डन सिटी क्लब में शामिल होने का रास्ता साफ़ हो गया।हालांकि मंत्री ने गोल्डन सिटी क्लब के बारे में जानकारी भी तभी दी थी जब उनसे पत्रकार वार्ता में इंदौर के हर बार स्वच्छता में अव्वल रहने का सवाल पूछा गया था।

गोल्डन सिटी क्लब

दरअसल देश में स्वच्छता के लिए शहरों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को नई दिशा देते हुए शहरी कार्य मंत्रालय ने गोल्डन सिटी क्लब की नई श्रेणी बनाने की घोषणा की है।इसका उद्देश्य स्वच्छता की रैंकिंग में लगातार शीर्ष स्थान पर आ रहे शहरों का एक अलग समूह बनाकर बाकी शहरों के बीच बराबरी का मुकाबला कराना है।गौरतलब है कि इंदौर शहर वर्षों से स्वच्छता रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल कर रहा हैं।इंदौर कई शहरों के लिए मॉडल के तौर पर भी रहा है।कई बार इंदौर को प्रतिस्पर्धा में मान कर शहर ये मन बना लेते है कि उनका नतीजा क्या होगा। इस कारण स्वस्थ प्रतिस्पर्धा नहीं हो पाती है। इस स्थिति को दूर करने के लिए आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने शुक्रवार को बताया कि गोल्डन सिटी क्लब कैटेगरी सभी वर्गों में होगी और इसमें केवल वे शहर शामिल होंगे, जो शीर्ष स्थान पर रहते रहे हैं।

2300 डंप साइट,22 करोड़ मीट्रिक टन कचरा

दिल्ली मे आयोजित पत्रकार वार्ता मे जानकारी देते हुए आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि केंद्र सरकार इस वर्ष के स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) की थीम ‘स्वभाव स्वच्छता संस्कार स्वच्छता (4एस)’ 2024 अभियान के दौरान लगभग दो लाख बहुत कठिन और गंदे स्थानों के समयबद्ध और लक्षित परिवर्तन का लक्ष्य बना रही है। ये स्वच्छता लक्ष्य इकाइयां (सीटीयू) इस वर्ष के अभियान के संदर्भ में मुख्य आकर्षण हैं और इसमें एक पोर्टल के माध्यम से सीटीयू की पहचान और मानचित्रण शामिल है। मनोहर लाल और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में सुषमा स्वराज भवन में आयोजित अभियान के उद्घाटन समारोह में इसकी घोषणा की। मंत्रियों ने बताया कि केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों, उद्योग भागीदारों और गैर-सरकारी संगठनों को सीटीयू अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अभियान में श्रमदान और सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से पर्यटक स्थलों, सार्वजनिक भवनों, वाणिज्यिक क्षेत्रों, सामुदायिक शौचालयों, सार्वजनिक शौचालयों, जल निकायों, चिड़ियाघरों, अभयारण्यों जैसे विभिन्न स्थलों पर बृहद सफाई अभियान शामिल हैं। सभी केंद्रीय मंत्रालय और राज्य इस अभियान को ध्यान में रखते हुए नागरिक सहभागिता गतिविधियों की योजना बना रहे हैं। यह अभियान 17 सितंबर से शुरू होगा और 2 अक्टूबर, 2024 को महात्मा गांधी की जयंती पर समाप्त होगा। मंत्री मनोहर लाल ने अपने संबोधन में कहा कि इस वर्ष यह अभियान ‘स्वच्छता ही सेवा है’ से समाज के प्रत्येक व्यक्ति के ‘स्वच्छता ही स्वभाव और संस्कार है’ की ओर एक बड़ी छलांग है। उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा जन आंदोलन होने के नाते यह अभियान पूरे समाज और पूरी सरकार को वैश्विक स्तर पर एक उदाहरण स्थापित करने के लिए आगे लाने का एक माध्यम मात्र है।मनोहर लाल ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में लगभग 2,300 डंप साइट हैं, जिनमें 22 करोड़ मीट्रिक टन कचरा है, जिनमें से 9 करोड़ मीट्रिक टन कचरे वाले 427 करोड़ डंप साइट को पूरी तरह से ठीक कर दिया गया है

शिशु मृत्यु दर और बीमारी मे कमी

इस अवसर पर अपने संबोधन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि देश में 93 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के पास शौचालय की सुविधा है और विश्व स्वास्थ्य संगठन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मिशन के पहले पांच वर्षों के दौरान शिशु मृत्यु दर में लगभग तीन लाख की कमी आई है। पाटिल ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन व्यवहार परिवर्तन के लिए एक जन आंदोलन बन गया है और अब इसे विश्व स्तर पर शिशु मृत्यु दर, बीमारी में कमी और बेहतर आजीविका के अवसरों के लिए एक सशक्त क्रियाकलाप के रूप में पहचाना जाता है।

हम तैयार है

इंदौर शहर स्वच्छता के लिए कई शहरों का आदर्श रहा है।स्वच्छता के लिए हमारी तैयारियां पूरी है।मंत्रालय से जिस तरह के सर्वेक्षण के निर्देश दिए जाएंगे वह मान्य है और उसके अनुरूप ही हम भाग लेंगे।लगातार 7 वर्षो से इंदौर स्वच्छता के पहले पायदान पर है।पहले इंदौर की तरफ से भी यह सुझाव दिया गया था कि इंदौर के लिए एक अलग वर्ग की प्रतिस्पर्धा की जाए।जिसके लिए सिर्फ उन्हीं शहरों का चयन हो जो लगातार एक दुसरे शहर को टक्कर दे रहे है।

पुष्यमित्र भार्गव,महापौर