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संकट में स्टील फर्नीचर इंडस्ट्री

- पेट्रोलियम पदार्थों व यूर्केन-रूस युद्ध से कच्चे माल की कीमतों में दोगुना इजाफा, 30 फीसदी गिरा उत्पादन

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संकट में स्टील फर्नीचर इंडस्ट्री

संकट में स्टील फर्नीचर इंडस्ट्री

विकास मिश्रा

इंदौर. यूक्रेन-रूस के बीच चल रहे युद्ध के अलावा लगातार बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों के कारण अब प्रदेश के लगभग सभी सेक्टर पर इसका विपरित असर पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई के बीच प्रदेश के स्टील फर्नीचर उद्योग की हालत बिगड़ रही है। उद्योग में काम आने वाले कच्चे माल की कीमतों में दोगुना तक की बढ़ोतरी होने के कारण उत्पादन में 25 से 30 फीसदी तक की कमी आई है। वहीं, पुराने दरों पर लिए ऑर्डर को पूरा करना अब उद्योगपतियों के लिए चुनौती बन गई है। उत्पादन कम करने के साथ ही कुछ उद्योग थोड़े समय के लिए बंद करने पर भी कुछ उद्योगपति विचार कर रहे हैं।

53 की शीट 106 रुपए किलो पर

एसोसिएशन ऑफ फर्नीचर मैन्युफेक्चरिंग एंड ट्रेडिंग एसोसिएशन मप्र के सचिव हरीश नागर ने बताया, स्टील फर्नीचर का मुख्य रॉ मटेरियल आयरन शीट और पाइप होते हैं। पिछले ढाई साल में इनकी कीमतों में दोगुना इजाफा हुआ है। दिसंबर 2018 में जो आयरन शीट 53 रुपए किलो मिल रही थी, वह अब 106 रुपए किलो तक पहुंच गई है। दिसंबर 2021 में इसके रेट करीब 70 रुपए किलो थे, लेकिन यूक्रेन युद्ध के कारण महज चार माह में 35 रुपए किलो का इसमें इजाफा हुआ है।

प्रदेश में 3500 इकाइयां प्रभावित

एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद बाफना ने बताया, सिर्फ स्टील फर्नीचर की बात करें तो मप्र में करीब 3500 उद्योग संचालित होते हैं। इंदौर में करीब 450 फैक्ट्रियां हैं। शीट और पाइप महंगा होने से पूरे प्रदेश में अचानक से उत्पादन गिरा है। अभी औसत 30 फीसदी उत्पादन कम हो चुका है।

पुरानी दरों पर लिए ऑर्डर पूरे करना मुश्किल

एआइएमपी के सहसचिव तरुण व्यास ने बताया, पिछले तीन महीने में तेजी से दाम बढ़ने से पुराने रेट में लिए गए ऑर्डर पूरे करना मुश्किल हो गया है। सरकारी सप्लाय से जुड़े ऑर्डर भी प्रभावित हो रहे हैं। मार्च से मई के बीच स्टील फर्नीचर का सीजन होता है, लेकिन पहले दो साल कोरोना के कारण और इस बार महंगे रॉ मटेरियल से उद्योगों को नुकसान हो रहा है।

कूलर की कीमतों में इजाफा

स्टील फर्नीचर की फैक्ट्रियों में कूलर का भी निर्माण होता है। गर्मियों में ही इनकी सबसे अधिक बिक्री होती है। कच्चा माल महंगा होने से उनकी कीमतें 12 से 15 हजार तक पहुंच गई हैं। इसके चलते भी बिक्री प्रभावित है। सरकार हस्तक्षेप करे एआइएमपी के अध्यक्ष प्रमोद डफरिया का कहना है, लोहे के दाम बढ़ने से सिर्फ स्टील फर्नीचर ही नहीं, बल्कि अन्य उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं। अब केंद्र और राज्य सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि लोगों को कुछ राहत मिल सके।

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