इंदौर

अब भी नहीं मिली भोपाल-इंदौर नॉनस्टॉप ट्रेन को रफ्तार

चार माह पहले भोपाल मंडल ने रेलवे बोर्ड को भेजा था प्रस्ताव

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Jan 03, 2019

इंदौर. भोपाल से इंदौर का सफर टे्रन से साढ़े 3 घंटे में पूरा करने के लिए नॉन स्टॉप इंटरसिटी ट्रेन का प्रस्ताव अब तक रेलवे बोर्ड के पास अटका हुआ है। खास बात यह है कि यह ट्रेन भोपाल से सुबह 6 बजे और इंदौर से शाम को 7 बजे चलेगी। यदि इस ट्रेन को शुरू किया जाता है तो इंदौर-भोपाल के बीच रेल सफर करने वाले यात्रियों में खासा इजाफा होगा। इसे देखते हुए भोपाल रेल मंडल ने जबलपुर मंडल को यह ट्रेन चलाए जाने का प्रस्ताव 4 माह पहले ही भेज दिया था। फिलहाल इन प्रस्ताव को बोर्ड ने अभी तक मंजूरी दी है या नहीं, इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है। इसे लेकर लोकसभा अध्यक्ष व सांसद सुमित्रा महाजन ने भी रेलवे बोर्ड से जानकारी मांगी है। इसके साथ ही इंदौर से जुड़े कुछ अन्य लंबित प्रोजेक्ट को लेकर भी जानकारी निकाली जा रही है।

इसलिए जरूरी है यह ट्रेन
फिल्हाल भोपाल से इंदौर के बीच कोई भी नॉन स्टॉप ट्रेन नहीं है। यात्रियों को दूरी तय करने में 6 घंटे से अधिक लगते हैं। इसके कारण ज्यादातर यात्री बस और टैक्सी में सफर करते हैं। इस रूट पर करीब 250 बसें व 300 टैक्सियां चलती हैं जिन्हें 1000 से 1500 यात्री रोज मिलते हैं। बस-टैक्सी में चलने वाले यात्रियों का मानना हैं कि नॉन स्टॉप ट्रेन मिलती है तो सफर ज्यादा आसान होगा। साथ ही भोपाल-इंदौर के बीच व्यापारिक व नौकरी पेशे से जुड़े लोगों का रोजाना आवागमन तेजी से बढ़ जाएगा।

देवास-मक्सी रूट से चलाने का प्रस्ताव
भोपाल मंडल ने नॉन स्टॉप ट्रेन को देवास-मक्सी रूट से चलाने का प्रस्ताव दिया है ताकि ट्रेन के कुल यात्रा समय में एक घंटा कम हो सके। वाया उज्जैन से भोपाल जाने वाली ट्रेन 6 घंटे का समय लेती है जबकि देवास-मक्सी रूट पर चलने से इंजन की दिशा नहीं बदलनी पड़ेगी। वहीं उज्जैन रूट में ज्यादा दूरी तय करने के साथ इंजन की दिशा बदलना पड़ती है।

इन कारणों से बंद हुई थी डबल डेकर
डबल डेकर सुबह भोपाल से इंदौर जाकर दोपहर में वापस आ जाती थी। फिर दोपहर में भोपाल से उज्जैन जाकर वापस आती थी। इस तरह शाम को इंदौर से भोपाल आने के लिए यह ट्रेन नहीं थी, रेलवे को घाटा होने की यह भी एक वजह थी। डबल डेकर चेयरकार सीटिंग रैक से चलती थी, जिसमें बैठक व्यवस्था सुविधानक नहीं थी। साथ ही किराया अधिक था, उस समय यात्री भी औसतन कम मिल रहे थे, रेलवे को घाटा हुआ था।

Published on:
03 Jan 2019 12:23 pm
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