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मां की महिमा देख अंग्रेज अफसर भी दंग

- देपालपुर में है 400 वर्ष पुराना महिषासुर मर्दिनी मंदिर - आज भी लगती है नि:संतान दंपतियों की भीड़

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इंदौर

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Manish Yadav

Sep 26, 2022

मां की महिमा देख अंग्रेज अफसर भी दंग

मां की महिमा देख अंग्रेज अफसर भी दंग

मनीष यादव@ इंदौर
मातारानी के वैसे तो कई चमत्कारिक मंदिर हैं। इनमें से एक इंदौर से कुछ दूर 400 वर्ष पुराना माता मंदिर है। इस मंदिर की जांच करने आए अंग्रेज अफसर भी वहां की शक्ति-चमत्कार देख कर इतना प्रभावित हुए थे कि कच्चे मंदिर को उन्होंने पक्का बनवा दिया था। वर्षों से यहां नि:संतान दंपती आ रहे हैं, माताजी सभी की मुराद पूरी करती हैं।
हम बात कर रहे हंै, देपालपुर स्थित महिषासुर मर्दिनी माता मंदिर की। यहां माता की प्रतिमा में महिषासुर का वध करते हुए दिखाया गया है। साथ ही छोटी माता का मंदिर और बटुक भैरव मंदिर यहां हैं। इस मंदिर के पास ही शंकर भगवान का मंदिर है।
एक दिन में तीन रूप
कहा जाता है कि महिषासुर मर्दिनी माता मंदिर में तीनों पहर में माता रानी का चेहरा बदल जाता है। सुबह वह बाल रूप में तो दोपहर किशोर और शाम को वृद्धावस्था चेहरे पर साफ दिखाई देती है। इसके साथ ही नवरात्र में यहां पर नि:संतान महिलाओं की गोद भरी जाती है। इसके अलावा एक बड़ा उत्सव यहां पर होता है, जिसमें दूर-दूर से लोग आते हंै।
जिंदा समाधि ले चुके
यहां मंदिर परिसर में ही महंत कुशालपुरी महाराज की समाधि है। उन्होंने विक्रम संवत 1701 में जीवित हालत में समाधि ले ली थी। जब वर्ष 2016 में समाधि स्थल का जीर्णोद्धार किया गया तो एक अंदाज से खोदा गया। किसी को भी याद नहीं था कि सही स्थान कहां है, जहां उन्होंने समाधि ली है। खुदाई में बैठी हुई हालत में ही उनके अवशेष मिले थे।

...और जांच करना भूल गया अंग्रेज अफसर
यहां के महंत शंकर पुरी गोस्वामी ने बताया कि यह मंदिर करीब 400 साल पुराना है। उनसे पहले छह पीढ़ी इस मंदिर में सेवा दे चुकी हैं। उन्होंने अपने बुर्जगों से सुना है कि एक अंग्रेज तहसीलदार वहां पर आया था। मंदिर में प्याला चढऩे की बात सुनी तो उसने भी देखने की इच्छा जताई। उसने यह देखा, लेकिन उसे इस बात पर विश्वास नहीं हुआ कि सचमुच में कोई मूर्ति ऐसा कर सकती है। इस पर उस अफसर ने दूसरे दिन आकर पूरी तरह से पड़ताल करने की बात कही। उसे सपने में माता दिखाई दीं। इससे वह इतना प्रभावित हुआ कि अगले दिन की जांच भूल गया। इसके बाद वह आया तो काले पत्थर से माता का मंदिर बनवा गया।

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