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डायरी पर प्लॉटों का सौदा करने वाले के खिलाफ मुहिम ठंडी पड़ी

प्रशासन ने कॉलोनाइजर व 16 दलालों को बुलाकर किया वांड ऑवर

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इंदौर. डायरी पर प्लॉटों का सोदा करने बाले कॉलोनाइजर व दलालों पर कलेक्टर ने नकेल कसी थी। 16 दलालों को नोटिस देकर बांडओवर भी किया। सभी कॉलोनाइजर को चेतावनी दी गई थी कि वे निगकरण कर दें, नहीं तो कार्रवाई होगी। समय के साथ ये मुहिम ठंडी पड़ गई, जबकि कई पीड़ितों ने एसडीएम को शिकायतें कर रखी हैं।

अयोध्यापुरी, श्री महालक्ष्मी नगर और पुष्य नगर में गृह निर्माण संस्था के सदस्यों को प्लॉट दिलाने के बाद कलेक्टर मनीष सिंह ने प्राइवेट कॉलोनाइजर व दलालों पर भी कसावट की थी। उन्होंने साफ कर दिया था कि डायरी पर प्लॉट बेचने वालों को बक्शा नहीं जाएगा। किसी भी खरीदार को दर-दर भटकने नहीं दिया जाएगा, ना ही अब कोई धोखाधड़ी का शिकार होगा।

सख्ती दिखाते हुए कलेक्टर ने 16 दलालों को चिन्हित भी किया, जिन्हें अपर कलेक्टर राजेश राठौर ने नोटिस भी थमाए। पेश होने के बाद एक को जेल की हवा भी खिला दी। सभी ने बांड भरकर बताया कि वे अब वे डायरी पर काम नहीं करेंगे। इसके अलावा कलेक्टर ने कॉलोनाइजरों को भी समय दिया था कि बे पीड़ितों की शिकायतों को दूर कर दें नहीं तो कार्रवाई होगी।

इस पर कई लोगों ने एसडीएम को लिखित में शिकायत पेश की। उसको लेकर वे अभी भी भटक रहे हैं। न तो कॉलोनाइजर उन्हें भाव दे रहे हैं और न एसडीएम उनकी सुनवाई कर रहे हैं। आवेदन आकर रखे हुए हैं। जांच के नाम पर उन्हें पटक रखा है। इधर, पीड़ित चक्कर भी लगा रहे हैं, जिन्हें सही जवाब नहीं मिल रहा। बताया जाता है कि कुछ पीड़ितों ने बड़े अधिकारियों को भी शिकायत की है कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही, पर उन्हें कोई जवाब नहीं दिया जा रहा। गौरतलब है कि डायरी पर प्लॉट बेचने वालों की सूची में शहर के कई बड़े जमीनी खिलाड़ी है, जिसमें दीपक मददा, चंपू अजमेरा, चिराग शाह, हैप्पी धवन, प्रफुल्ल सकलेचा और अमरलाल बजाज का नाम शामिल है।

ऐसी भी आ रही शिकायतें
शिकायतकर्ता को एक एसडीएम ने तो यहां तक बोल दिया कि आपकी डायरी सही है या नहीं, हमको कैसे आलम? उसकी जांच कराई जाएगी । डायरी गलत निकली तो बुम्हरे भी मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है। लेकर शिकायतकर्ता का कहना था कि डायरी पर पैसा दिया है। अब ये असली है या नकली, ये कौन तय करेगा? बताया जाता है कि ऐसी बात वह एसडीएम कई शिकायतकर्ता को कह चुके है। बताते हैं कि इसमें से दर तो डर भी गए, लौटकर नहीं आए। अब सवाल खड़े हो रहे है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए मुहिम चल रही है या शिकायतों को खत्म करने के लिए लगे हैं।

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