
दि ग्रैंड पिनेकल: पुलिस का कारनामा, असल कलाकार को दे दी क्लीनचिट
इंदौर. दि ग्रैंड पिनेकल कॉलोनी में गड़बड़ी के चलते नगर निगम अपर आयुक्त ने संजय अग्रवाल और उनके परिजनों पर एफआइआर दर्ज करने के लिए थाने में आवेदन किया था, लेकिन पुलिस ने कारनामा करते हुए सिर्फ तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर इतिश्री कर ली। मामले में असल कलाकार को पुलिस ने क्लीनचिट दे दी, जबकि जांच में स्पष्ट था कि उन्होंने धरोहर के प्लॉट बेचे। इसके अलावा जमीन के जादूगर बॉबी छाबड़ा के गुर्गे की भी भूमिका अहम थी। उसे भी बचा लिया गया।
बायपास से कुछ दूरी पर बनी बहुचर्चित कॉलोनी दी ग्रैंड पिनेकल के 25 पीड़ित प्लॉटधारियों ने कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी से न्याय की गुहार लगाई थी। पीड़ितों का कहना था कि हमारे साथ धोखा करने के साथ कॉलोनी के कर्ताधर्ताओं ने बंधक प्लॉट भी बेच दिए। कलेक्टर ने नगर निगम कॉलोनी सेल के प्रभारी अपर आयुक्त मनोज पाठक को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जांच में बड़ा घोटाला सामने आया। पाठक ने लसूड़िया थाना प्रभारी को दी ग्रैंड पिनेकल कॉलोनी काटने वाले नीना संजय अग्रवाल, रितु मनोज अग्रवाल तर्फे संजय अग्रवाल निवासी प्रगति विहार बिचौली मर्दाना के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के लिए पत्र लिखा है।
अग्रवाल परिवार ने निगम के साथ कूटरचित दस्तावेजों के साथ बड़ी धोखाधड़ी की। खास बात यह है कि पाठक की शिकायत को ताक पर रखते हुए पुलिस ने 18 फरियादियों की तरफ से पुष्पेंद्र वडेरा, आशीष दास और गिरीश वाधवानी के खिलाफ 420, 406 व 34 जमानती धारा में मुकदमा दर्ज किया। मजेदार बात यह है कि एफआइआर में पाठक की शिकायत का कही भी उल्लेख नहीं किया गया।
अग्रवाल ने पेश किए थे झूठे शपथ पत्र
अग्रवाल ने सर्वे नंबर 260/1 व 261/1 की 8.31 हेक्टेयर जमीन को पहले ही बेच दी थी। विकास अनुमति के लिए उन्होंने झूठे शपथ पत्र दिए, जिसमें जमीन का खुद को मालिक बताया। पीड़ितों ने इसकी शिकायत कर रजिस्ट्री पेश की। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बेच दिए बंधक प्लॉट
निपानिया सर्वे नंबर 260/1261/1, 261/2 व 264/1 की कुल 8.991 हेक्टेयर की जमीन मालिक नीना संजय अग्रवाल, रितू मनोज अग्रवाल तर्फे संजय अग्रवाल ने निगम से 9 दिसंबर 2015 को विकास अनुमति प्राप्त की थी। उसमें प्लॉट 17, 18, 24, 25, 26, 40, 41, 42, 67, 68, 97, 100 कुल 12 प्लॉट बंधक रखे थे। 100 नंबर का प्लॉट अग्रवाल परिवार ने 20 जुलाई 2017 को बेच दिया, जिसकी बकायदा गुरनामसिंह धारीवाल ने रजिस्ट्री की थी, जबकि कॉलोनी का विकास भी नहीं हुआ और बंधक प्लॉट निगम ने नहीं छोड़े।
बॉबी का गुर्गा हो गया मासूम
एफआइआर में श्री जेएसएम देवकॉन के संचालक गुरनाम सिंह धारीवाल को इनोसेंट (मासूम) बताया। कहा गया है कि उसे बेवजह बदनामी झेलनी पड़ रही है, जबकि कहानी ही कुछ और है। इस कंपनी में फरियादी पंकज रिझवानी ने अपने प्लॉट के एवज में 5.50 लाख रुपए जमा किए थे, इसलिए धारीवाल को भी आरोपी बनाया जाना चाहिए था। सभी पीड़ितों ने जेएसएम कंपनी के खाते में पैसा जमा किया, जिसे दास की फर्जी कंपनी बताया गया। बड़ी बात यह है कि उसी कंपनी में उर्मिला तिवारी ने भी पैसा जमा किया था, लेकिन उसकी रजिस्ट्री श्री जेएसएम के संचालक धारीवाल ने की। इससे साफ है कि सारा काम मिलीभगत से चल रहा था।
Published on:
13 Sept 2023 08:19 am

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