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इस बार चैत्र नवरात्र में घोड़े पर सवार होकर आएगी देवी मां

नवरात्रि में कई प्रकार के विशेष योग बनेंगे। इनमें सर्वार्थ सिद्धि योग रवि योग लक्ष्मी प्राप्ति के योग बनाएगा। साथ ही कई प्रकार के कष्ट से मुक्ति मिलेगी। चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा का वाहन अश्व यानी घोड़ा होगा शास्त्रों के अनुसार शनिवार को नवरात्रि आरंभ होती है तो माता का वाहन अश्व होता है।

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इंदौर

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Lavin Owhal

Mar 25, 2022

इस बार चैत्र नवरात्र में घोड़े पर सवार होकर आएगी देवी मां

इस बार चैत्र नवरात्र में घोड़े पर सवार होकर आएगी देवी मां

इंदौर. चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 2 अप्रैल से होगी जो इस बार पूरे 9 दिन की रहेगी। तिथियों में कोई भी उतार-चढ़ाव नहीं आएगा। चैत्र मास के नवरात्रि में नवग्रह में से 3 ग्रहों का विशेष राशि परिवर्तन होगा जिसमे सबसे पहले चंद्र ग्रह जो कि सवा दो दिन में राशि परिवर्तन कर लेता है तो उसका राशि परिवर्तन नवरात्रि के प्रथम दिन 11.20 पर होगा। फिर नवरात्रि के छठ दिन ग्रहों के सेनापति मंगल ग्रह राशि परिवर्तन करेंगे जो कि कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। सप्तमी को बुध ग्रह मेष राशि में गोचर करेंगे। इस नवरात्रि के प्रारंभ के समय द्वि-ग्रह की युति रहेगी। मकर राशि में मंगल-शनि, कुंभ राशि में गुरु-शुक्र, मीन राशि में सूर्य, बुध और चंद्र ग्रह रहेंगे। छाया ग्रह राहु वृषभ राशि में और केतु वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे।
सर्वार्थ सिद्धी योग व रवि योग में होगी लक्ष्मी प्राप्ति
पं. निलेश शास्त्री ने बताया कि नवरात्रि में कई प्रकार के विशेष योग बनेंगे। इनमें सर्वार्थ सिद्धि योग रवि योग लक्ष्मी प्राप्ति के योग बनाएगा। साथ ही कई प्रकार के कष्ट से मुक्ति मिलेगी। चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा का वाहन अश्व यानी घोड़ा होगा शास्त्रों के अनुसार शनिवार को नवरात्रि आरंभ होती है तो माता का वाहन अश्व होता है।
देवी भागवत के अनुसार -
शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे।
गुरौ शुक्रे चदोलायां बुधे नौका प्रकीत्र्तिता।।
वाहनों का यह होती है लाभ हानि
माता दुर्गा जिस वाहन से पृथ्वी पर आती हैं, उसके अनुसार सालभर होने वाली घटनाओं का भी अनुमान किया जाता है। इनमें कुछ वाहन शुभ फल देने वाले और कुछ अशुभ फल देने वाले होते हैं। देवी जब हाथी पर सवार होकर आती है तो पानी ज्यादा बरसता है। यदि घोड़े पर आती हैं तो युद्ध की आशंका बढ़ जाती है। देवी नौका पर आती हैं तो सभी की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और डोली पर आती हैं तो महामारी का भय बना रहता हैं। इसका भी वर्णन देवी भागवत में इस प्रकार किया गया है -
गजे च जलदा देवी क्षत्र भंग स्तुरंगमे।
नोकायां सर्वसिद्धि स्या ढोलायां मरणंधुवम्।।
पं. निलेश शास्त्री ने बताया कि माता का आगमन का वाहन होता है, उसी प्रकार माता का प्रस्थान का वाहन भी लाभ-हानि, शुभ-अशुभ को दर्शाता है। देवी भागवत पुराण के अनुसार रविवार या सोमवार को देवी भैंसे की सवारी से जाती हैं तो देश में रोग और शोक बढ़ता है। शनिवार या मंगलवार को देवी मुर्गे पर सवार होकर जाती हैं, जिससे दु:ख और कष्ट की वृद्धि होती है। बुधवार या शुक्रवार को देवी हाथी पर जाती है, जिससे बारिश ज्यादा होती है। गुरुवार को मां दुर्गा मनुष्य की सवारी से जाती हैं. इससे सुख और शांति की वृद्धि होती है।
शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुज शोककरा।
शनि भौमदिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करी विकला।।
बुधशुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभ वृष्टिकरा।
सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहन गा शुभ सौख्य करा॥
यह रहेंगे घट स्थापना के शुभ मुहूर्त
प्रात: घट स्थापना करना शुभ नहीं रहेगा। चोघडि़ए के अनुसार प्रात:काल का चौघडिय़ा रहेगा और चित्रा नक्षत्र वेद्धित योग होने के कारण सुबह 8.30 के बाद घट स्थापना करना सर्वोत्तम रहेगा। उसके बाद वेधिति योग आरंभ होने से पहले 7.53 से 8.30 तक घट स्थापना कर सकते हैं। सूर्योदय ६.22 बजे से 6.56 बजे तक घट स्थापना करना भी ठीक रहेगा।