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मतकर ने जिद, जज्बा और जुनून से सपने को किया साकार, विदेशों में भी बजता है डंका

देश ही नहीं विदेशों में भी है ख्याती, 96 नेशनल-इंटरनेशनल अवॉर्ड अपने नाम किए।  

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मतकर ने जिद, जज्बा और जुनून से सपने को किया साकार, विदेशों में भी बजता है डंका

मतकर ने जिद, जज्बा और जुनून से सपने को किया साकार, विदेशों में भी बजता है डंका

शत्रुघ्न गुप्ता
इंदौर. कहते हैं, जिद, जज्बा और जुनून कठिन से कठिन राह को भी आसान बना देती है। ऐसे ही जुनूनी है, सचिन मतकर। वे पीथमपुर की एक ऑटोमोबाइल कंपनी में मैनेजर हैं। लेकिन, फोटोग्राफी का शौक और जुनून उन पर इस कदर हावी हैं कि वे तमाम व्यस्तता के बीच वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी के लिए समय निकाल लेते हैं। इसी जुनून और जज्बे के बल पर वे फोटोग्राफी में 96 नेशनल, इंटरनेशनल अवॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। सचिन मतकर 2004 से फोर्स मोटर्स पीथमपुर में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर पदस्थ हैं। मतकर बताते हैं, बचपन से ही मुझे नदी, पहाड़, झरने, जंगल, पशु-पक्षियों को देखने, सुनने और महसूस करने की इच्छा होती थी। इसके लिए मैंने फेडरेशन ऑफ इंडियन फोटोग्राफी से डिग्री प्राप्त की। वे कहते हैं, अब वे वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी के जरिए अपने सपने को महसूस कर पा रहे हैं।

विदेशों में भी लग चुकी है फोटो प्रदर्शनी
मतकर के फोटो इतने सुंदर और लाजवाब होते हैं कि इन्हें नेशनल और इंटरनेशनल लेवल के प्रदर्शनियों में शामिल किया जाता है। लोगों द्वारा इनके फोटो को खासी सराहना मिलती है। मतकर के प्रदेश और देश में कई स्थानों पर फोटोग्राफ प्रदर्शित हो चुके हैं। देश के साथ ही विदेशों में 25 जगहों पर प्रदर्शनी लग चुकी है। जिसमें न्यूयार्क एग्जीबिशन और न्यूमेसटिक ब्राजील प्रमुख है।

देशभर के अभ्यारणों की कर चुके हैं सैर
मतकर ज्यादातर राष्ट्रीय अभयारण्यों की सैर कर चुके हैं। कुछ अभ्यारण में तीन-तीन बार जा चुके हैं। पशु-पक्षियों को कैमरे में कैद करने का जुनून इन्हें अभ्यारण की तरफ खींच लाता है। अब तक ये सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, बांधवगढ़ राष्ट्रीय अभ्यारण्य, ताड़ोबा राष्ट्रीय अभ्यारण्य, कुनो, नल सरोवर, खीवनी, सैलाना, सरदारपुर, रण ऑफ कच्छ, चम्बल सेंचुरी समेत कई अन्य अभ्यारण में फोटोग्राफी के लिए जा चुके हैं।

विदेशी धरती पर भी लिए फोटो
सितंबर 2018 में केन्या के मसाई मारा नेशनल पार्क में मतकर फोटोग्राफी के लिए गए थे। यहां के जंगलों में कई-कई दिन रुककर हाथी, शेर, तेंदुआ, जंगली भैंसा और गेंडे के फोटो खींचे। यहीं नहीं, इन्होंने वाइल्ड बीस्ट का शिकार कर रहे शेर परिवार को भी अपने कैमरे में कैद किया।

जंगलों का अनूठा संग्रह है
देश-विदेश के जंगलों की यात्रा का अनुभव होने से मतकर कई सरकारी-गैर सरकारी गतिविधियों में भाग लेते हैं। वे पक्षी गणना, तितली गणना, वृक्षारोपण, नेचर वॉक, ट्रेकिंग आदि गतिविधियों में प्रतिभागी बनते हैं। यही कारण है कि इनके पास जंगल से संबंधित फोटोग्राफ का एक बड़ा संग्रह है।

96 बार मिले पुरस्कार
फोटोग्राफी की अनूठी प्रतिभा के चलते इन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं। देश और विदेशों में 1100 स्थानों पर इनके फोटोग्राफ स्वीकार हुए। अब तक 96 पुरस्कार मिल चुके हैं। बाम्बे नेचर हिस्ट्री ऑफ सोसायटी ने 2 बार, राज्य स्तरीय फोटोग्राफी प्रतियोगिता भोपाल, अंतरराज्यीय फोटोग्राफी प्रतियोगिता, ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश समेत कई संस्थाओं ने इन्हें बेस्ट फोटोग्राफी के अवॉर्ड के लिए चुना है।