
समर क्लासेस में नया ट्रेंड : फिटनेस की वजह से डांस के प्रति बढ़ रहा आकर्षण
Reena sharma vijayvargiya
इंदौर. डांस एक नृत्य या योग नहीं बल्कि यह महायोग है, जिससे आत्मा, शरीर और दिमाग एक ही रूप में मिल जाते हैं। यह अनुभूति बहुत मुश्किल से लोगों को आती है। कथक नृत्य का परिवेश इसी तरह बहुत गहरा है। इसमें हर चीज, हर बात को दर्शाया जा सकता है। चाहे वो प्रकृति हो या फिर सेव गर्ल चाइल्ड जैसे मैसेज हो। अंतर्मन की गहराइयों से जो भाव मुद्राओं के द्वारा प्रस्तुत किए जाते हैं वही डांस है। डांस के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ता जा रहा है फिर चाहे वो किसी भी तरह का डांस हो। कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जिनकी धडक़न डांस ही है, जिनके दिन की शुरुआत डांस से ही होती है और जो दिनरात केवल डांस के बारे में ही सोचते हैं।
पहली बार कावड़ यात्रा में डांस किया, पता नहीं था यही एक दिन कॅरियर बन जाएगा
मैं पिछले 15 साल से डांस कर रहा हूं। यह डांस कई आयोजनो में होता है। कावड़ यात्रा से इस डांस की शुरुआत की थी अब शहर के कई अच्छे सिंगर्स के साथ डांस करने का मौका मिल रहा है। 2018 में मुझे फेमस स्टार ऑफ इंदौर का अवार्ड भी मिला था। इसके बाद 2019 में मेरी ग्रुप पार्टनर (मेरी पत्नी) के साथ मुझे यह अवार्ड दोबारा मिला। इसी साल फेमस स्टार ऑफ एमपी का भी अवार्ड मिल चुका है। डांस मेरी जिंदगी है इसके बिना लाइफ का मैं सोच भी नहीं सकता हूं। कोविड19 के दौर में भी मैंने ऑनलाइन क्लासेस ली थी इसलिए डांस ही है जिससे मेरा घर चलता है। मुझे लोग कृष्ण के नाम से ही जानते हैं। डांस से ही जीता हूं, कमाता हूं और डांस से ही खाता हूं। मैंने ऑल अवर इंडिया में डांस किया है।
अंकित शर्मा, डेवोशनल डांस फॉर्म
हर चीज में तलाशती हूं डांस फॉर्म, क्लास थर्ड से कर रही हूं डांस
मैं क्लास थर्ड में थी जब से डांस कर रही हूं इसका मैंने 7 साल का प्रशिक्षण लिया था। अब मैं 51 साल की हूं और अन्य कई बच्चों को डांस सीखा रही हूं। मेरे लिए डांस एक पूरी रेगुलर लाइफ की साइकिल की तरह है। जब मैं म्यूजिक सुनती हूं तो उसकी बीट पर मुझे कोरियोग्राफी सूझती है। किसी का ब्लॉग पढ़ती हूं तो लगता है कि उसे मैं कैसे डांस से उसे नरेट कर सकती हूं। मतबल मैं जो भी सुनती हूं या पढ़ाती हूं उसे डांस फॉर्म में प्रजेंट करने की प्लानिंग करने लगती हूं। मैं सुबह उठते ही योग करती हूं और योग और डांस दोनों एक ही सिक्के के पहलू हैं। रोजाना डेढ़ घंटे का रियाज करती हूं और फिर क्लास लेती हूं। भरतनाट्यम एक स्कल्चपचर डांस है जो इसी स्ट्रक्चर में होता है। यह माइंड, बॉडी और सोल का बैलेंस है।
निर्जरी वसावड़ा, भरतनाट्यम
स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता से बढ़ रहा क्रेज
डांस के प्रति लोगों की सोच में काफी परिवर्तन आया है, क्योंकि जब सोच बदल जाती है तो सब कुछ बदल जाता है। कोविड19 के दो साल के बाद डांस की फील्ड में काफी तेजी से इजाफा हुआ है। लोग डांस के महत्व को समझने लगे हैं। हमारे सेंटर पर ही कई लोग हरिद्वार, विशाखापट्टनम, गुजरात, सुजालपुर, धार जैसी तमाम जगहों से लोग डांस सीखने आ रहे हैं।
गुरु डॉ. रागिनी मक्खर
जरूरतमंद बच्चों की मदद करूंगी
दस साल से मैं कथक कर रही हूं। दस साल पहले तो मैंने डांस को केवल हॉबी के तौर पर ही लिया था। फिर धीरेधीरे मुझे कथक पसंद आने लगा और इसकी गुरुशिष्य परंपरा ने मुझे काफी अट्रेक्ट किया। मेरे लिए डांस एक शिक्षा के तौर पर है यानि जिस तरह शिक्षा जरूरी है उसी तरह मेरे लिए डांस जरूरी है। मैं जरूरतमंद बच्चों को भी इसकी ट्रेनिंग देना चाहती हूं, ताकि उनकी प्रतिभा सामने आए।
प्रणिता शुक्रे, कथक डांस
Published on:
03 May 2022 06:10 pm
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