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15 रुपए का जीएसटी न भरने से इस शख्स पर लगा 20 हजार का जुर्माना

एक व्यापारी को आंध्र प्रदेश टैक्स ऑफिसर ने कारण बताओ नोटिस जारी किया , जिसमें मात्र 15 रुपए के जीएसटी न भरने के लिए 20,000 रुपए का फाइन लगाया गया ह

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GST

नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि आप पर एक लाख प्रतिशत का जुर्माना लग सकता है। ऐसा ही एक वाकया सामने आया जब आंध्र प्रदेश के एक व्यापारी जीएसटी नहीं जमा करने पर इससे भी ज्यादा का फाइन मांगा गया। इस व्यापारी को आंध्र प्रदेश टैक्स ऑफिसर ने एक कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिसमें उससे मात्र 15 रुपए के जीएसटी न भरने के लिए 20,000 रुपए का फाइन लगाया गया है। नोटिस मे लिखा गया है कि, ये स्पष्ट होता है कि आपने जानबूझकर जीएसटी कानून का उलंघ्घन किया है जो कि एक दंडनीय अपराध है। इसके लिए आपको दंड के रुप में 20,000 रुपए भरना होगा।


सरकार द्वारा जीएसटी लागू करने के बाद अपने तरह का यह पहला मामला है। सरकार ने लगभग 200 सरकारी अधिकारियों को दुकानों पर जाकर निरीक्षण करने और टैक्स नियम के उल्लंघन करने वाले व्यापारियों की पहचान करने का आदेश दिया था। ये अधिकारी इसका निरीक्षण करने के बाद ऐसे मामले को संबंधित टैक्स अधिकारी को रिपोर्ट करने लगे है, जिसके बाद अब नए जीएसटी नियमों के उल्लंघन करने वाले व्यापारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।


जीएसटी के उल्लंघन पर लगने वाला जुर्माना तय नहीं

ऐसे ही एक व्यापारी को जारी किए गए दूसरे नोटिस मे कहा गया है कि, यदि आपने 300 रुपए का कोई सामान खरीदा जिसके लिए आपने ग्राहक से पूरा पैसा लिया। लेकिन इसके लिए आपने ग्राहक को कोई भी टैक्स इनवॉइस नहीं दिया तो ऐसे में आपने टैक्स नियम का उल्लंघन करते है। जिसके लिए आप पर दंड लगेगा। ऐसे मे मामले में ध्यान देने वाली बात ये है कि जीएसटी नियमों का उल्लंघन करने पर आप पर कितना दंड लगेगा, ये तय नहीं है। यह पूरी तरह से टैक्स अधिकारी पर निर्भर करता है। हालांकि इसपर कुछ जानकारों का मानना है कि यदि ऐसे ही व्यापारियों को दंडित किया गया तो एक समय छोटे व्यापरी जीएसटी को अपनाने में संकोच करने लगेेंगे।


करोबारियों को मिले प्रोत्साहन

टैक्स नियमों से जुड़े एक जानकार के मुताबिक, आदर्श तौर पर ऐसे छोटे मामलों में जुर्माना नहीं लगाना चाहिए क्योंकि जीएसटी कानून अभी नया है और टैक्सपेयर्स कुछ शुरूआती गलतियां कर सकते हैं। ऐसे में टैक्सपेयर्स को प्रोत्साहित करना जरूरी है ताकि वो निडर रूप से जीएसटी के इस नए फ्रेमवर्क को अपना सकें।